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देशभर के शिल्प उत्पादों से सजा सांस्कृतिक संकुल

Sat, 16 Nov 2013 05:42 AM IST
Varanasi
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वाराणसी। गंगा महोत्सव के तहत आयोजित होने वाला राष्ट्रीय गांधी शिल्प बाजार भी गुरुवार को चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में गुलजार हो गया। मेला क्षेत्र में देश के 25 राज्यों से 311 शिल्पी अपने हस्तशिल्प उत्पादों के साथ पहुंच गए हैं। एक ही स्थान पर देश के हर हिस्से का प्रतिनिधित्व नजर आ रहा है। दस दिवसीय इस मेले में इस बार दो करोड़ से भी अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है।
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सांस्कृतिक संकुल में मेले का उद्घाटन लोनिवि व सिंचाई राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल ने किया। उन्होंने स्टालों पर जाकर शिल्पियों से बातचीत की। उनसे यहां मुहैया कराई जा रही सुविधाओं और उनके शिल्प उत्पाद के बारे में जानकारी ली। हालांकि जिस समय सुरेंद्र पटेल ने मेले का उद्घाटन किया स्टाल सज रहे थे। पंजाब, उत्तराखंड, अरुणांचल, मध्य प्रदेश, बंगाल, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू, कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, मेघालय, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, आसाम, झारखंड, उड़्ीसा, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित 25 राज्यों के शिल्प उत्पाद स्टालों पर बिक्री के लिए सजे हैं। रंगोली, केन एवं बंबू, चर्म शिल्प, पटचित्र, मिथिला पेंटिंग, बीड वर्क, धातु शिल्प, पैचवर्क, इंब्राइ़डरी, जरी क्राफ्ट, ज्वेलरी, वुड कार्विंग, ब्लू आर्ट, फर्नीचर, हैंड प्रिंडेट टेक्सटाइल, कुंदन ज्वेलरी, कश्मीरी शाल, जयपुरी रजाई, सहारनपुर के फर्नीचर, पंजाबी जूती आदि लेकर शिल्पी आए हैं। मेला क्षेत्र खरीददारों के लिए दोपहर एक बजे से रात नौ बजे तक खुला रहेगा। उद्घाटन के मौके पर मंडलायुक्त चंचल कुमार तिवारी, सहायक निदेशक हथकरघा केपी वर्मा, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी रवींद्र मिश्रा, महाप्रबंधक उद्योग केंद्र उमेश सिंह, पर्यटन विभाग की तरफ से मेले की व्यवस्था संभाल रहे ओपी मौर्या, रामऔतार आदि उपस्थित थे।
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मेले में प्रवेश के लिए टिकट का रेट दस रुपये
वाराणसी। गांधी शिल्प बाजार में प्रवेश शुल्क इस बार बढ़ाकर दस रुपये कर दिया गया है। पिछले साल प्रवेश शुल्क पांच रुपये था। प्रवेश शुल्क का रेट बढ़ाने के मुद्दे पर आयोजकों का तर्क था कि इससे मेला क्षेत्र में सफाई, शिल्पियों को बेहतर मेडिकल और आवासीय सुविधाएं आदि मुहैया कराने में सहूलियत होगी।
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