वाराणसी। ईद-ए-मोहाबिला की पूर्व संध्या पर दरगाह फातमान सहित कई स्थानों पर महफिल सजाई गई। दुआख्वानी के साथ ही ईद-ए-मोहाबिला पर रोशनी डाली गई। शायरों ने कलाम भी पेश किए। कार्यक्रम के बाद तबर्रुक तकसीम किया गया।
दरगाह फातमान में मंगलवार की शाम आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ जिया रिजवी की तिलावते कलामे पाक से हुआ। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर ने तकरीर करते हुए कहा कि आज से 1424 साल पहले 24 जिलहिज्जा 10 हिजरी को नबी हजरत मुहम्मद सल्ल. ने यमन के बखरान नामक स्थान पर इस्लाम का परचम फहराया था। इस दौरान उनके साथ दामाद हजरत अली, बेटी जनाबे फातिमा, दोनों नवासे हसन और हुसैन मौजूद थे। इस जीत को हजरत मुहम्मद ने ईद-ए-मोहाबिला नाम दिया था। शाज सिवानी ने कलाम पेश किया। वहीं, अर्दली बाजार स्थित मस्जिद मीर गुलाम अब्बास में मौलाना इक्तेदार मेहंदी ने तकरीर की और शायरों ने कलाम पेश किए। महफिल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।