फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पतितपावनी हों निर्मल, यही होगा नवरात्र का सबसे बड़ा फल

Mon, 07 Oct 2013 05:38 AM IST
Varanasi
विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। मूर्ति विसर्जन से गंगा में होने वाले प्रदूषण को लेकर काशी के संत-महात्मा भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि परंपराओं का पालन जरूरी है। लेकिन जब परंपराएं हमारी सोच, हमारी पहचान के लिए ही संकट बनने लगें तो इसके अन्य विकल्प खोजे जाने चाहिए। गंगा का जल आचमन के लायक बना रहे, इसके लिए हर स्तर पर सजग प्रयास किए जाएं। प्रतिमा विसर्जन के लिए पूजा समितियों की बैठक बुलाकर अन्य विकल्पों पर विचार-विमर्श किया जाए।
विज्ञापन

पतित पावनी के प्रदूषित होने की पीड़ा से आम लोगों, पर्यावरणविदों के साथ ही संत भी व्यथित हैं। वे चाहते हैं कि ऐसे हर जरूरी उपाय किए जाएं, जिससे गंगा का जल आचमन के योग्य बचा रह सके। संतों का कहना है कि जल प्रवाह में प्रतिमाओं के विसर्जन की मान्यता का पालन करते हुए ऐसे विकल्प तलाशे जाने चाहिए जिससे गंगा की धारा प्रदूषित न होने पाए। ये मुद्दा इस समय और भी अहम हो गया है क्योंकि टिहरी समेत 50 अन्य बांध परियोजनाओं के चलते अब गंगा में वेग न के बराबर रह गया है। महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा कहते हैं कि गंगा को प्रदूषित होने से बचाया जा सके, तो यही नवरात्र के व्रत-अनुष्ठान का असली फल होगा। देवी के रूप में पृथ्वी पर बहने वाली गंगा की निर्मलता के लिए मूर्ति विसर्जन की वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। इसके लिए शहर और ग्रामीण इलाके की पूजा समितियों की बैठकें कराकर विकल्प तलाशे जाने चाहिए। पंडालों को सेक्टर में बांटकर अलग-अलग इलाकों के कुंडों-तालाबों में मूर्ति विसर्जन कराया जाना चाहिए। रामाधीन दास, ब्रह्मचारी गुरु शरण सानंद महाराज की भी राय है कि गंगा जल को निर्मल बनाए रखने के लिए प्रतिमाओं का विसर्जन शहर से दूर नियत स्थानों पर किया जाना चाहिए।

कोट
फोटो
पहले काशी में गंगा को प्रदूषित करने वाले सबसे अहम कारकों में शामिल नालों को बंद कराने की इच्छाशक्ति जागृत की जानी चाहिए। मूर्तियों के विसर्जन से बहुत प्रदूषण नहीं फैलता। फिर भी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए दूसरे विकल्प खोजे जाएं, तो बेहतर होगा।
विज्ञापन

प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, महंत-संकट मोचन मंदिर

फोटो
शहर से दूर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए पूजा समितियों की बैठक बुलाई जानी चाहिए। प्रशासन को अलग-अलग मोहल्लों की प्रतिमाओं को नजदीक स्थित कुंडों-तालाबों में विसर्जित कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए। महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा

फोटो
गंगा की निर्मलता का मसला सबसे ऊपर है। जल में ही प्रतिमाएं विसर्जित करने का विधान है। ऐसे में अगर किसी कुंड-तालाब में विसर्जन की व्यवस्था बनती है तो इसे सहर्ष स्वीकार किया जाएगा। -जीएन सिंह, अध्यक्ष-शारदा विद्या मंदिर

कोट
फोटो
सच है कि गंगा का जल आचमन के लिए ही है। उसमें विसर्जन करना ठीक नहीं है। अब मूर्ति विसर्जन के अन्य विकल्पों पर एक राय बननी चाहिए, ताकि गंगा को प्रदूषण मुक्त किया जा सके। राकेश- सार्वजनिक दुर्गा पूजनोत्सव समिति -टाउनहाल
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें