वाराणसी। बिजली विभाग की ऑनलाइन बिलिंग प्रणाली एक पखवाड़े से ध्वस्त है। विभाग किसी तरह महीने का टारगेट पूरा करने में लगा हुआ है। इसके लिए शनिवार और रविवार को अवकाश के बावजूद कलेक्शन काउंटर खोलना पड़ा। हजारों उपभोक्ताओं के बिलों का मैनुअल तरीके से भुगतान कराया गया। इसका असर अगले महीने दिखाई देगा जब लोगों के बिलों में पिछला बकाया आएगा। विभाग की ओर से ऑटोमैटिक बिलिंग मशीन (केयास्क) लगाई जानी थी लेकिन इस पर काम ही नहीं हुुआ।
बिजली विभाग ने अपनी बिलिंग प्रणाली के लिए ट्यूलिप कंपनी से नेटवर्क लिया था। कंपनी का नेटवर्क एक पखवाड़े पहले ध्वस्त हो गया। उसके बाद बिल भुगतान की व्यवस्था ही लड़खड़ा गई। नगरीय विद्युत वितरण मंडल वाराणसी ने आननफानन में बीएसएनएल से दो एमबीपीएस की आप्टिकल फाइबर लाइन लेकर बिलिंग व्यवस्था दुरुस्त की लेकिन स्पीड कम होने के कारण उपभोक्ताओं को घंटों कतार में खड़े रहना पड़ रहा है। इसके बाद भी स्थिति नहीं संभली तो विभाग ने 61 कलेक्शन सेंटर में से 35 स्थानों पर थ्री जी डाटाकार्ड के जरिए बिलिंग प्रणाली संचालित करने की कोशिश की। इसके अलावा 19 जगहों पर मैनुअल तरीके से बिलों का भुगतान किया गया। इसके बाद भी महीने के अंत तक बिल जमा नहीं हो सके तो विभाग ने छुट्टियों में तीन-चार दिन काउंटर खोल कर भुगतान जमा कराया। नगरीय विद्युत वितरण मंडल प्रथम के अधिशासी अभियंता पीपी सिंह का कहना है कि पिछले महीने की तुलना में लगभग 50 लाख की अधिक वसूली हुई है लेकिन ऑनलाइन बिलिंग प्रणाली ध्वस्त न होती तो एक करोड़ रुपये और जमा होने की उम्मीद थी।
मुगलसराय, गाजीपुर, जौनपुर आदि शहरों में भी बिल वसूली की स्थिति संभल नहीं पाई। मुख्य अभियंता एके पांडेय का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जा सके लेकिन बिलिंग प्रणाली ध्वस्त होने से इन जिलों में काफी दिक्कत हो रही है। मुख्य अभियंता कार्यालय में आटोमैटिक बिल भुगतान मशीन (केयास्क) लगी है जहां रोजाना पांच-छह सौ लोग बिलों का भुगतान करते हैं। ऐसी मशीनें प्रत्येक खंडीय कार्यालयों में लगाई जानी थी। मुख्य अभियंता का कहना है कि मशीन ठीक से काम नहीं कर पा रही है जिसके चलते इस योजना को फिलहाल रोक दिया गया है। ऑनलाइन बिलिंग से घर बैठे भुगतान किया जा सकता है लेकिन उसका इस्तेमाल कम ही लोग करते हैं।