वाराणसी। दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़े इंडियन मुजाहिद्दीन के स्वयंभू कमांडर यासीन भटकल का नाम शीतला घाट पर सात दिसंबर 2010 की शाम हुए बम विस्फोट में भी आया था। वह पूर्वांचल के आतंकियों का आका रहा है। उसके साथ पकड़े गए असदुल्लाह उर्फ तबरेज के बारे में बटाला हाउस कांड के बाद से ही एटीएस केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मुहैया करा रही थी। वैसे सुरक्षा एजेंसियां भटकल बंधु पर भी शक जता रही थीं।
शीतला घाट पर सात दिसंबर 2010 की शाम आतंकियों ने पत्थर के नीचे बम विस्फोट किया था। धमाके के चलते एक साल की मासूम स्वस्तिका और मध्यप्रदेश से आई महिला फुलरानी की मौत हो गई थी, जबकि 40 लोग घायल हुए थे। घटना के बाद एनआईए, एनएसजी, एटीएस समेत देश की अन्य एजेंसियों ने मौके का मुआयना किया था, लेकिन आतंकियों का पता नहीं चल सका। लोकसभा में शीतला घाट विस्फोट का मुद्दा उठने पर सुरक्षा एजेंसियों की काफी किरकिरी हुई थी। उस समय सुरक्षा एजेंसियां यासीन भटकल और उसके भाई रियाज भटकल व आजमगढ़ से जुड़े आतंकियों पर शक जता रही थीं। एजेंसियों का मानना है कि भटकल बंधु पूर्वांचल से जुड़े आरिज उर्फ जुनैद, खालिद, साजिद उर्फ बड़ा साजिद, असदुल्लाह उर्फ तबरेज, वासिक उर्फ विल्ला और डा. शहनवाज को किसी भी घटना को अंजाम देने के लिए आर्डर देते थे। इनमें शहनवाज ने तबरेज के नेतृत्व में एक टीम भी गठित की थी। बटाला हाउस कांड के बाद से ही पूर्वांचल के आतंकियों के बारे एटीएस लगातार इनपुट दे रही थी, मगर तबरेज भाग निकला। सुरक्षा एजेंसियां डा. शहनवाज और तबरेज का फोन काफी दिनों से सुन रही थीं। पिछले माह एटीएस ने तबरेज का बंाग्लादेश की सीमा तक पीछा भी किया था लेकिन इसके बाद भी वह बच निकला। एजेंसियों की मानें तो देश से भागकर 11 आतंकी नेपाल में डेरा जमाए हुए थे। वहां एटीएस समेत अन्य एजेंसियों का दबाव पड़ने पर वे खाड़ी देशों की तरफ भाग निकले। आजमगढ़ के आतंकियों ने शरजाह में अपना अड्डा बनाया था।