वाराणसी। निचले स्तरों की बस्तियों में बाढ़ से घिरते लोगों को फिलहाल नुकसान या दूसरी ठांव तलाशने की चिंता छोड़ देनी चाहिए। मंगलवार की दोपहर बाद गंगा का जलस्तर 67.060 मीटर पहुंचकर स्थिर हो गया। माना जा रहा है कि उत्तराखंड के बांधों से पानी नहीं छोड़ा गया और पहाड़ों पर बारिश की स्थिति सामान्य रही तो फिलहाल गंगा में बढ़ाव नहीं होगी। इससे पहले बढ़ाव को देखते हुए प्रशासन ने नौकायन पर रोक लगा दी थी और मजदूर दूसरे कामों की तलाश में जुट गए थे।
हफ्ते भर तक लगातार बढ़ाव के बाद दोपहर बाद गंगा का जलस्तर स्थिर हो गया। दिन के 12 बजे से शाम छह बजे तक बढ़ाव दर्ज नहीं हुआ। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक मिर्जापुर में दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घटाव हो रहा है तो इलाहाबाद में गंगा के घटने की दर तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे है। फाफामऊ में दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा का जल स्तर खिसक रहा है। वाराणसी में गंगा के स्थिर होने से खासतौर से वरुणा के किनारे वाली निचली सतह की बस्तियों को राहत मिलेगी। साथ ही शहर का तटीय जन जीवन भी सुकून में हो जाएगा। वरुणा किनारे के लोग जहां सामान हटाने और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुट गए थे, वहीं शहर में घाट किनारे के तीर्थपुरोहितों ने भूतल और पहली मंजिल के भवनों को खाली कर दिया था। एडीएम सिटी एमपी सिंह के निर्देश पर नौका संचालन रोक दिए जाने से नावों पर खेवा मारने वाले मजदूर दूसरे धंधे की तलाश में जुट गए थे। सबसे ज्यादा मुश्किल ढाब इलाके के पांच गावों में सोता खुलने से हो गई थी। गंगा के स्थिर होने से मोकलपुर, रमचंदीपुर, गोबरहा जैसी बस्तियों को लोग भी राहस की सांस लेंगे।