गाजीपुर। जलीय जीवों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ जिले में कारगर साबित हो रही है। इसके तहत जलीय क्षेत्र में कृषि कार्य करने वाले किसानों एवं मछुवारों को योजना का भरपूर लाभ मिल रहा है। जिले में अब तक 96 लाभार्थी इस योजना से जुड़ कर अपने व्यवसाय को गति दे रहे हें। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग 83 हेक्टेयर भूमि में तालाब खोदवाएगा। साथ ही इससे अधिक से अधिक लोगों को जोड़ेगा।
केंद्रीय बजट 2019 में मछली पालन करने वाले एवं जलीय क्षेत्र में काम करने वाले मछुआरों एवं किसानों के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में बजट दिया गया था। इसके बाद 20-2021 में योजना को चालू करते हुए अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत पात्र व्यक्ति द्वारा जमीन उपलब्ध कराने के बाद विभाग तालाब की खुदाई का कार्य खुद कराएगा। उसमें सामान्य वर्ग के लिए 40 फीसदी तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 60 फीसदी धन भी खर्च करेगा। तालाब का दस साल के लिए पट्टा होगा। इतना ही नहीं मत्स्य पालन के लिए बीज भी विभाग उपलब्ध कराएगा। इसके लाभार्थी को किसान क्रेडिड योजना के तहत लोन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
जुलाई 2020 से जनवरी 2021 तक जिले में 96 लोगों को इस योजना से जोड़ने के साथ ही तालाबों की खुदाई का कार्य किया गया है। इसका कुल क्षेत्रफल 83.36 हेक्टेयर है। विभाग द्वारा इनका पट्टा भी कर दिया गया है। जबकि शासन स्तर से विभाग को 83 हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया था। मत्स्य पालकों के लिए सरकार की तरफ से दो लाख का मृत्यु बीमा और 1.50 लाख का अपाहिज बीमा भी दिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि पोखरों की खुदाई का कार्य चल रहा है। पोखरा खुदाई के बाद एक हेक्टेयर में दस हजार मत्स्य बीज डाला जाएगा।
कोट
मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए योजना शुरू की गई है। योजना के माध्यम से मछुआरा समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों के लिए ऋण की सुविधा आसान की गई है। ताकि जलीय क्षेत्रों में भी जलीय उत्पादों से संबंधित या अन्य को व्यवसाय करने में बढ़ावा मिले।
-गिरीश चंद्र यादव, जिला मत्स्य पालक विकास अधिकारी