वाराणसी। कैंट रेलवे स्टेशन के मुख्य भवन और विकसित किए गए प्लेटफार्म देखने के लिए दो दिन पहले झारखंड के धुरुवा क्षेत्र से भागकर यहां पहुंच गए। शुक्र रहा कि इसकी जानकारी साथी संस्था तक पहुंच गई और उन्होंने दोनों बच्चों को परिजनों को सौंप दिया।
कैंट रेलवे स्टेशन पर दो मासूमों को साथी संस्था से जुड़े लोगों ने देखा तो उन्होंने उनसे पूछताछ शुरू की। बच्चों ने कहा- सुना था कि बनारस का रेलवे स्टेशन बहुत खूबसूरत बना है। इसीलिए घरवालों को बिना बताए पांच सौ रुपये लिए और रेलवे स्टेशन देखने आ गए। दोनों बच्चों को जीआरपी की मदद से गुरुवार को परिजनों के सुपुर्द किया गया। झारखंड से आए परिजन बच्चों को लेकर लौट गए।
इसके अलावा मालदा के भवानीपुर के बच्चे को भी संस्था ने बुधवार को पकड़ा था। उसे भदोही में कालीन बुनकरी के लिए लाया गया था। कैमूर के बेटे को भी संस्था के लोगों ने पकड़ा। वह घूमने के लिए अकेले आगरा जा रहा था। आरा के मोहम्मदपुर और गाजीपुर के बच्चों को भी संस्था ने जीआरपी के सुपुर्द किया। परिजनों को बुलाकर इन सभी बच्चों को परिजनों को सौंप दिया गया। बच्चों को परिजनों से मिलाने वालों में जीआरपी सीओ विमल किशोर श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर गीता राय, साथी संस्था की अनीमा दास, शिवानी और चंदन आदि शामिल रहे।
तीन किशोर मुक्त कराए गए
वाराणसी। जिले के होटलों और दुकानों में काम करने वाले किशोरों को मुक्त कराने के लिए बुधवार को क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम द्वारा अभियान चलाया गया। एएचटीयू प्रभारी भूपेश कुमार राय ने बताया कि इस दौरान लंका स्थित सिंह डिलाइट फैमिली रेस्टोरेंट से एक किशोर और मिर्जामुराद के करधना स्थित किशन किराना स्टोर से दो किशोर मुक्त कराए गए। तीनों किशोरों को सिगरा स्थित अस्मिता चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया गया है।