वाराणसी। अभी काशी से कछुआ अभ्यारण्य हटाया नहीं गया है। वन विभाग ने हाल ही में चार सौ मांसाहारी कछुए गंगा में छोड़े हैं। गंगा को स्वच्छ रखने में ये अहम भूमिका निभाएंगे।
गंगा में जल परिवहन शुरू किए जाने की वजह से यहां से कछुआ अभ्यारण्य को प्रयागराज शिफ्ट किया जाना है। रामनगर में मल्टी मॉडल टर्मिनल तैयार हो चुका है। क्रूज और नावों का चालन जारी है। जांच में पता चला है कि कछुए यहां से पलायन कर जाते हैं। इसलिए अभ्यारण्य को डाउन स्ट्रीम में 30 किलोमीटर आगे कोठारी गांव के पास शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। यह गांव इलाहाबाद और सीतामढ़ी के बीच मेजा के पास है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने चार माह पहले सर्वे कर सेंक्चुअरी की शिफ्टिंग को हरी झंडी दी थी। इसके मद्देनजर वहीं रिपोर्ट के आधार पर ही मुश्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में स्टेट वाइल्ड लाइफ एडवाइजरी बोर्ड की बैठक में भी इस प्रस्ताव को पास कर दिया गया। अब यह प्रस्ताव अपने अंतिम चरण में सीआईसी के पास है, जहां से इसे जल्द हरी झंडी मिलने की संभावना है। डीएफओ मनोज खरे ने बताया कि शिफ्टिंग का कार्य अपने अंतिम चरण में है। लेकिन अब तक फैसला न आने के चलते ही मांसाहारी कछुए छोड़े गए हैं।
कुडों में डाले जाएंगे कछुए
शहर के कुंडों के पानी को स्वच्छ रखने के लिए वन विभाग योजना बना रहा है। इस योजना में शहर के उन प्राचीन कुंडों का चयन किया जाएगा, जहां वर्ष भर पानी भरा रहता है। उन कुंडों में कछुए छोडे़ जाएंगे, वे उस कुंड को साफ रख सकें। डीएफओ ने बताया कि पानी के लिए कछुए बहुत ही लाभकारी है। इसलिए यह सर्वे कराया जा रहा है ताकि कुंडों को स्वच्छ बनाया जा सकें। इसका लाभ शहरवासियों को मिलेगा। वहीं कुंड का पानी भी स्वच्छ होगा।