वाराणसी। पितरकुंडा में 25 अक्तूबर 2016 को अवैध तरीके से पटाखा बनाने के दौरान हुए धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद भी जिला पुलिस और प्रशासन पटाखों की अवैध बिक्री को लेकर गंभीर नहीं हुआ। नतीजतन, दो साल बाद एक बार फिर बुधवार को लहरतारा में दो लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति जिंदगी-मौत के बीच जूझ रहा है। इससे पहले वर्ष 2009 में लोहता थाना के अलावल में पटाखा बनाने के दौरान पिता-पुत्र की मौत हो गई थी और कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे।
शहर मेें पटाखे के अवैध भंडारण और बिक्री के लिए घनी आबादी वाले दालमंडी, नई सड़क, हड़हा, लल्लापुरा, पितरकुंडा, दोषीपुरा और लोहता थाना के कुछ क्षेत्र चिह्नित हैं। सूत्रों के अनुसार इन इलाकों में दीपावली के लगभग एक माह पहले ही पटाखों का अवैध तरीके से भंडारण कर लिया जाता है। 50 करोड़ से रुपये ज्यादा के पटाखे अवैध तरीके से दालमंडी से पूर्वांचल के जिलों में बिक्री के लिए जाते हैं। इस काम में स्थानीय पुलिस, एलआईयू के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों की भी मिलीभगत होती है।