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प्रशासन के बार बार के दावों से नहीं मर पा रहा समस्याओं का रावण

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वाराणसी । प्रभु ने कई बार सिर और भुजाओं को काटा परंतु कटते ही वे तुरंत नए हो गए। यही हाल शहर की समस्याओं के रावण का है। प्रशासन इन्हें बार-बार खत्म करने का दावा करता है। टाइम लाइन बनाता है। मगर समस्याएं ज्यों की त्यों हैं। आम जन इनसे जूझ रहा है। दशहरे पर ऐसी ही दस समस्याओं से आपको अवगत करा रहे हैं, जो प्रशासन के नाकाफी प्रयासों के आगे रावण की तरह ही अमर लगती हैं। जनता का सहयोग लेकर अगर प्रशासन सुनियोजित तरीके से कार्य करे तो इन्हें खत्म किया जा सकता है...
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गंदगी
स्मार्ट सिटी में शामिल शहर बनारस की गलियों में गंदगी एक बड़ी समस्या है। 90 वार्डों में रोज 600 टन कचरा निकलता है। सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था सही न होने से काफी कचरा सड़कों और गलियों में ही फेला रहता है। सीवरेज सिस्टम काफी पुराना है। जरूरत के हिसाब से इसमें सुधार न होने से मोहल्लों और बाजारों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या रहती है। शहरों में जगह-जगह छोटे डस्टबिन रखकर इनकी नियमित सफाई और कूड़े के उठान से इस समस्या से निपटा जा सकता है। कूड़ा-कचरा खुले में फेंकने से बचने की आदत लोगों को भी डालनी होगी।
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टूटी सड़कें
बनारस की अधिकांश सड़कें जगह-जगह टूटी हैं। इनसे उड़ती धूल और गड्ढों पर लगने वाले झटके लोगों बीमार कर रहे हैं और कई तरह के दर्द और हादसों का कारण भी बन रहे हैं। खुदी सड़क 15 दिन में न बनाने पर राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी इंजीनियरों को जेल भेजने की चेतावनी भी दे चुके हैं मगर उसका कोई असर नजर नहीं आ रहा। जब कोई वीआईपी आता है तो आनन फानन में टूटी सड़कों पर पैचवर्क किया जाता है। नगर निगम और लोकनिर्माण विभाग विभाग के पास इंजीनियरों की फौज है, अगर दोनों विभाग चाहें तो इस समस्या से आसानी से निजात दिला सकते हैं।
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जाम
शहर में जाम की समस्या इतनी विकराल है कि हर काशीवासी इससे रोज जूझता है। अफसरों की सेना इसका हल निकालने में विफल है। मुख्य कारण सड़कों पर अतिक्रमण। बेतरतीब खड़े रहने वाले ऑटो, ई-रिक्शा और अन्य वाहन हैं। चौराहों पर जहां ट्रैफिक क्रासिंग बनती है, वहां यातायात को नियंत्रित करने के लिए उचित ट्रैफिक सिस्टम नहीं हैं। चार चौरहों पर ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम शुरू किया था, उसके अनुरूप यातायात को सुचारू करने में ट्रैफिक पुलिस विफल रही। इस समस्या से निजता दिलाने के लिए योजना बनाकर काम करने की जरूरत है।
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महिलाओं के प्रति अपराध
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की मुहिम के बीच महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की घटनाओं में कमी नहीं आई है। इसी तरह से गांवों, मुहल्लों और कॉलोनियों में किशोरियों और युवतियों के साथ छेड़खानी, दुराचार के प्रयास और दुराचार की वारदात में कमी नहीं आ रही है। कानून व्यवस्था के साथ ही समाज को भी इन्हें रोकने में अहम भूमिका निभानी होगी।
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अतिक्रमण
अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है। कहीं दुकानों के आगे तो कहीं धार्मिक स्थल की आड़ में अतिक्रमण किया गया है। अतिक्रमण के लिए कहीं न कहीं सरकारी मशीनरी जिम्मेदार है। कई बार बैठकों में यह बात उठी कि धन उगाही के नाम पर पुलिस ही अतिक्रमण को बढ़ावा देती है। यही कारण है कि अतिक्रमण कम नहीं हो रहे हैं। साथ ही कोई निर्धारित वेंडिंग जोन नहीं होने से भी अतिक्रमण की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।
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प्रदूषण
प्रदूषण के मामले में वाराणसी देश में तीसरे स्थान पर है। जहां जल प्रदूषण में 350 एमएलडी मलजल प्रतिदिन गंगा और वरुणा में गिरता है। इससे ये नदियां दूषित हो रही हैं। वहीं औद्योगिक क्षेत्रों और अमानक वाहनों के चलने से जहरीली गैसों का उत्सजर्न चरम पर है। विभिन्न तरीकों से प्रदूषित हो रहा वातावरण शहर वासियों को गंभीर रोग बांट रहा है।
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भ्रष्टाचार
तमाम रोक के बावजूद न तो भ्रष्टाचार कम हुआ और न ही भ्रष्टाचारी। गैर कानूनी काम करने वालों ने कुछ सफेदपोशों का दामन थाम लिया है। यही कारण है कि उनके ऊपर पुलिस प्रशासन कार्रवाई करने से बचती है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए भाजपा सरकार ने कई प्रयास किए तो भ्रष्टाचारियों ने भ्रष्टाचार के तरीके बदल कर अपना काम जारी रखा है। इसे खत्म करने के लिए गंभीर प्रयास जरूरी हैं।
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कुपोषण
जिले में कुपोषण के खात्मे के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से दावे तो बहुत किए जा रहे हैं लेकिन कुपोषित बच्चों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही। अब भी जिले के आठ ब्लॉकों में कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की संख्या करीब 15 हजार है। आठ ब्लॉकों में ऐसे 100 बच्चे हैं, जिनके दिल में छेद है और उनका ऑपरेशन कराया जाना जरूरी है। अब अगर बच्चों की मानीटरिंग नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बच्चों की संख्या बढ़ती ही जाएगी।
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अपमिश्रण
खाने पीने के सामान में अपमिश्रण जारी है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन की ओर से केवल त्योहारों पर ही जांच अभियान चलाया जाता है। अब तक चार सौ से अधिक जांच में 50 सैंपल जांच रिपोर्ट में फेल हुए हैं। मिलावटखोरी रोकने के लिए नियमित अभियान चलाने की जरूरत है। अधिकारी भी केवल छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई करके कोरम पूरा कर रहे हैं, जबकि बड़े प्रतिष्ठानों पर छापेमारी करने से पूर्व बड़े अधिकारियों से अनुमति का इंतजार करते हैं।
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बेरोजगारी
बेरोजगारी की समस्या सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है। युवा आंदोलन प्रदर्शन के जरिए सरकार से नौकरी की मांग रहे हैं। सरकार की ओर से मुद्रा योजना, स्टार्ट अप, स्टैंड योजना लाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हो पा रहे। जरूरत के मुताबिक नौकरियां निकाली जानी चाहिए।
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