वाराणसी। देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फूले की जयंती पर बुधवार को आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों ने स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया। अंबेडकर स्मारक कचहरी पर यूपी अनुसूचित जाति, जनजाति बेसिक शिक्षक कल्याण एसोसिएशन के बैनर तले जन्म दिन समारोह शिक्षक दिवस के रुप में मना तो चंदुआ छित्तूपुर स्थित कुशवाहा भवन में संगोष्ठी में वक्ताओं ने उनके जीवनी पर विस्तार से चर्चा की।
अंबेडकर स्मारक पर भंते पी शिवली ने मौजूद लोगों को त्रिशरण, पंचशील एवं बुद्ध वंदना कराया। बतौर मुख्य अतिथि अखिल भारतीय अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन नई दिल्ली के राष्ट्रीय महासचिव बुद्धमित्र मुसाफिर ने उन्हें नारी मुक्ति आंदोलन का सशक्त नेता बताया। कहा कि महिला शिक्षा के प्रति उनके योगदान को कभी भूला नहीं जा सकता है। इस दौरान अरुण प्रेमी, बृजेश कुमार भारतीय, विजय कुमार राव, विनोद कुमार, त्रिभुवन राम, गोपाल राम आदि लोग मौजूद रहे। उधर कुशवाहा भवन में आयोजित ‘स्त्री शिक्षा में सावित्री बाई फुले का योगदान’ विषयक परिचर्चा में मिथिलेश कुमार कुशवाहा ने कहा कि स्त्री शिक्षित होगी तभी परिवार और समाज शिक्षित होगा। 18वीं सदी में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये सावित्री बाई फुले ने शिक्षा की पहली ज्योति जलाई थी। पुष्पा मौर्य ने कहा कि सावित्री बाई फुले पहली शिक्षिका थीं जिन्होंने शुरू में विभिन्न जातियों की नौ बालिकाओं से स्कूल शुरू किया था। इस दौरान राधेश्याम मौर्य, डॉ. रमेश कुशवाहा, डॉ. दिनेश सिंह कुशवाहा, राममूरत सिंह, अभिजीत प्रजापति, गौरव कुशवाहा, प्रकाश कुमार, राम लखन आदि उपस्थित रहे।