वाराणसी। जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने गांधी शिल्प बाजार को विविधता में एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि वाराणसी ही नही बल्कि आसपास के जनपदों के लोग भी वर्षभर गांधी शिल्प बाजार का इंतजार करते हैं। इस मेले में देश के अन्य प्रांतों सहित कोने-कोने से आने वाले शिल्पियों द्वारा तैयार हैंडीक्राफ्ट तथा अन्य सामग्री लोगों को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराई जाती है। यह बातें जिलाधिकारी ने चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल परिसर में आयोजित 10 दिवसीय गांधी शिल्प बाजार के समापन अवसर पर कहीं। उन्होंने बताया कि वाराणसी की कला एवं संस्कृति को संजोए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आयोजित होने वालेे गंगा महोत्सव के अंतर्गत इस वर्ष गांधी शिल्प बाजार एक से 10 नवंबर तक सांस्कृतिक संकुल परिसर में आयोजित किया गया। इसका औपचारिक समापन शुक्रवार को कर दिया गया पर शिल्पीगणों के बेहद मांग तथा द्वितीय शनिवार एवं रविवार के दृष्टिगत शिल्प मेला निरंतर 11 तथा12 नवंबर को भी चलता रहेगा।
इस शिल्प मेला बाजार में पंजाब से 10, उत्तराखंड से 17, मध्य प्रदेश से छह, पश्चिम बंगाल से नौ, जम्मू कश्मीर से 26, राजस्थान से 12, हिमाचल प्रदेश से एक, हरियाणा से छह, दिल्ली से 23, गुजरात दो, झारखंड से तीन, महाराष्ट्र से दो, उड़ीसा से दो, बिहार से सात के अलावा उत्तर प्रदेश से 248 सहित कुल 380 स्टाल लगाए गए हैं। इसके अलावा कुल 80 शिल्पी खुले में अपने शिल्प का प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस साल 2016 में शिल्पकारों द्वारा 1.35 करोड़ रुपये की बिक्री हुई थी। इस वर्ष नौ नवंबर तक एक करोड़ दस लाख छानबे हजार की बिक्री हो चुकी है। एक अनुमान के अनुसार बाजार में लगभग सवा लाख भारतीय एवं लगभग 500 विदेशी पर्यटकों ने भ्रमण किया। जिलाधिकारी ने बेस्ट डिस्प्ले में मथुरा के अखिलेश कुमार को इंब्राइडरी साड़ी, नई दिल्ली के रवि को पेंच वर्क हैंड वर्क, रांची के राहुल को हैंड इंब्राइडरी, बेस्ट क्राफ्ट में कानपुर के कृष्ण गुप्ता को, राजस्थान के मयूर ध्वज सिंह को बिकानेर पेंटिंग, राजस्थान के प्रकाश जोशी को मीनाकारी तथा बेस्ट सेल में राजस्थान के मुकेश कुमार मीणा को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।