वाराणसी। ाकाशवाणी में 10-15 साल से कार्यरत आकस्मिक उद्घोषक /कंपियर ने उनकी लिखित-स्वर परीक्षा और साक्षात्कार कराने का विरोध किया है। महानिदेशालय के निर्देश के प्रति नाराजगी जताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा है। कहा है कि कार्यरत कर्मचारियों की फिर से परीक्षा लेना उचित नहीं है।
शुक्रवार को भेलूपुर स्थित एक रेस्टोरेंट में प्रेसवार्ता में आकस्मिक उद्घोषक और कंपियर पद पर सेवा देने वाली अंजू तिवारी, कमलेश वर्मा, सुरेखा सिंह, स्वप्निल मिश्रा आदि ने आरोप लगाया कि इस तरह का फरमान जारी कर महानिदेशालय की ओर से निकाले जाने का षडयंत्र किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सहायक केंद्र निदेशक/ कार्यक्रम प्रमुख से न्याय नहीं मिला। बताया कि गुरुवार को पीएम के संसदीय कार्यालय के माध्यम से प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराया गया है। कैट (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, हाईकोर्ट इलाहाबाद) का भी सहारा लिया गया, जिसमें कोर्ट ने परीक्षा से राहत देने का आदेश जारी किया है। आरोप लगाया कि परीक्षा का विरोध करने पर उनका नाम ड्यूटी लिस्ट से काट दिया गया। उधर आकाशवाणी के कार्यक्रम प्रमुख आनंद देव सिंह ने बताया कि महानिदेशालय के आदेश का पालन कराते हुए परीक्षा कराई गई। कोर्ट के फैसले के बाद मामले में कुछ कहा जा सकता है।