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हद है!: वाराणसी में 10 साल में मरम्मत पर खर्च किए 850 करोड़ रुपये, इतने में बन जाती नई सीसी रोड

Mon, 09 Sep 2024 10:20 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में 10 साल में मरम्मत पर 850 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इतनी राशि में नई सीसी रोड का निर्माण कराया जा सकता था। शहर में अधिकतर सड़कें पीडब्ल्यूडी और नगर निगम की है।
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महमूरगंज रोड बदहाल सड़क। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीते दस साल में शहर की सड़कों की मरम्मत के नाम पर 850 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इतनी धनराशि में शहर में सीसी रोड बन जाती। एक किमी सीसी सड़क बनाने में 80 लाख से 1.20 करोड़ रुपये का खर्च आता है। वही डामर की सड़क बनाने में प्रति किमी सड़क का खर्च 40 से 60 लाख रुपये आता है।

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जैसे ही सड़क बनती है वैसे ही खोदाई करने वाले एजेंसियां आ जाती हैं। इसके बाद बनी बनाई सड़कें खोदाई के कारण खराब हो जाती हैं। शहर की अधिकांश सड़कों के खराब होने के पीछे विभागों में समन्वय का अभाव है। आज तक सरकारी विभागों में समन्वय नहीं बन पाया। सड़क खोदाई करने वालों में दूरसंचार कंपनियां, गैस, बिजली, पानी, सीवर डालने वाली एजेंसियां हैं। इन लाइनों में अक्सर खराबी आती है। जिसे दुरुस्त करने के नाम पर सड़कों की खोदाई की जाती है। इस पर कोई अंकुश नहीं है।

ज्यादातर सड़क बारिश में कई जगहों से दब गई है। जिसके चलते इस सड़क पर चलने पर हिचकोले महसूस हो रहे हैं। सिगरा, महमूरगंज, कचहरी, लंका, मंडुवाडीह, चेतगंज, बेनियाबाग, गोदौलिया, गिरिजाघर आदि इलाकों में अक्सर खोदाई देखने को मिलती है। जिससे सड़कें खराब होती हैं और बनती रहती हैं।
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पिछले दिनों सिगरा पर एक ही सड़क को छह महीने में छह बार खोदा गया। यहां ट्रेंचलेस सीवर लाइन डालने के लिए खोदाई की गई थी। अभी काम खत्म नहीं हुआ था कि सिगरा चौराहे पर लीकेज के चलते सड़क धंस गई। तीन दिनों तक रास्ता बंद करके लीकेज दुरुस्त कराया गया। इसके बाद भी सिगरा से सिद्धगिरिबाग जाने वाला मार्ग क्षतिग्रस्त है। सड़क का निर्माण हुए एक महीना भी पूरा नहीं हुआ कि फिर से धंस गई थी।

गुणवत्ता का नहीं रखा जाता ध्यान

सड़क की मरम्मत में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है। दरअसल सड़क बनाने वाली एजेंसियां गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देती हैं। पहले जब सड़क का निर्माण होता था तो सड़क की खोदाई की जाती थी। गिट्टी डालने के बाद सड़क का निर्माण होता था। अब न कोई खोदाई की जाती है और न ही गिट्टी डाली जाती है। केवल सड़क के धूल को मशीन से उड़ाकर इस पर डामर की एक परत चढ़ा दी जाती है। इससे सड़कों में मजबूती नहीं आती है। यही कारण है बार बार सड़कों की मरम्मत करानी पड़ती है।
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ट्रेंचलेस तकनीक का हो सकता है इस्तेमाल

जानकारों के अनुसार सड़क को खोदाई से बचाने के लिए ट्रेंचलेस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक में सड़क की खोदाई नहीं करनी पड़ती है। केवल दो किनारों पर खोदकर अंदर ही अंदर काम किया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं होता है। सड़क की खोदाई करने के लिए पहले डायवर्जन प्लान बनता है। फिर रास्ता बंद करके खोदाई की जाती है।
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