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निजी कंपनी के हवाले एमआरआई जांच, मरीजों की जेब पर ‘आंच’

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वाराणसी। बीएचयू ट्रामा सेंटर में सर सुंदरलाल अस्पताल की तुलना में एमआरआई जांच की फीस ज्यादा होने की वजह व्यवस्था का निजीकरण होना है। ये बात अलग है कि ये बीएचयू प्रशासन की अपनी व्यवस्था है लेकिन इससे मरीजों की जेब ढीली हो रही है। जिस जांच के लिए उन्हें सर सुंदरलाल अस्पताल में 2200 रुपये देना पड़ता है, वहीं जांच ट्रॉमा सेंटर में 3000 में होती है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद बीएचयू अस्पताल प्रशासन ने अपनी सफाई में बताया कि ट्रॉमा सेंटर की मशीन विश्वविद्यालय की नहीं है, इस वजह से जांच में अंतर है।
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वर्ष 2015 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन किया था। यहां जांच की सुविधाएं तो हैं लेकिन अगर एमआरआई जांच की बात करें तो बीएचयू अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर की फीस में काफी अंतर है। 15 मई को अमर उजाला में संस्थान एक, जांच एक, फीस में अंतर शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और अपनी सफाई दी है।
उपकुलसचिव ने बताया है कि ट्रॉमा सेंटर में एमआरआई जांच पीपीपी मॉडल पर प्राइवेट कंपनी के माध्यम से होती है। मशीन के संचालन से लेकर बिजली खपत, कर्मचारियों का वेतन आदि खर्च कंपनी ही वहन करती है। विश्वविद्यालय और निजी कंपनी के बीच हुए समझौते के तहत आमदनी की साझेदारी 35:65 फीसदी की है। इसके अलावा सर सुंदरलाल अस्पताल की सेवा पूरी तरह से विश्वविद्यालय की होने की वजह से ही जांच फीस तुलनात्मक रूप से कम है। अब सवाल यह है कि अगर बीएचयू प्रशासन अस्पताल में जांच कर सकता है तो ट्रॉमा सेंटर में भी इस तरह के प्रयास होने चाहिए, जिससे कि दूर दराज से आने वाले गरीब मरीजों को जांच कराने में राहत मिले।
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