वाराणसी। डमरूओं की निनाद, शंखनाद और हर-हर का जयघोष। माता पार्वती की जय के गगनभेदी घोष, आसमान में उड़ता अबीर-गुलाल। बाबा विश्वनाथ जब मां गौरा का गौना कराकर चले तो महंत आवास से मंदिर प्रांगण तक हर-हर महादेव का जयकारा लगाते भक्तों की श्रद्धा का उल्लास उमड़ पड़ा। रंगभरी एकादशी पर बाबा के भाल गुलाल सजते ही काशीवासियों की भी होली शुरू हो गई। जनसैलाब का आलम यह था कि मंदिर की गलियों में तिल रखने की जगह तक नहीं बची थी। मंदिर की गलियां गुलाल से पट गईं। जमीन से आसमान तक बस लाल ही लाल स्वरूप नजर आ रहा था। भक्त भी लाल और महादेव भी लाल। देव समूहों के साथ ही काशी वासी भी 354 वर्षों से चली आ रही परंपरा के साक्षी बने।
रविवार को शाम पांच बजे राजसी ठाट-बाट के साथ बाबा विश्वनाथ माता गौरा और अंक मे विराजे प्रथमेश पालकी में निकले तो पूरी प्रकृति एक रंग मे रंगी नजर आई। सभी एक ही स्वर हर-हर महादेव का उद्घोष कर रहे थे। अबीर गुलाल और भस्म के बीच मानो धरती और अंबर की दूरी सिमट सी गई हो। पालकी यात्रा महंत आवास से मंदिर तक गई। मंदिर में गर्भगृह में प्रतिमाओं को स्थापित कर विशेष सप्तऋषि आरती उतारी गई। इससे पूर्व पीतांबर रंग के खादी का जरीदार कुर्ता (मिर्जई), खादी की धोती और गयासुद्दीन की सुनहरी पगड़ी धारण किए खूब फब रहे थे। वहीं माता का भी अद्भुत शृंगार किया गया था। माता की गोद में बैठे गणेश। भोले नाथ के परिवार को जो भी देखता, देखता ही रह गया। महिलाओं ने मां गौरा से जहां अखंड सौभाग्या का वर मांगा तो युवतियों ने भोले शंकर के समान पति की कामना की। वहीं पुरुषों ने सुख-समृद्धि की कामना की।
विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आवास पर सुबह से ही गहमा-गहमी रही। दोपहर में भोग आरती के बाद आम भक्तों के लिए श्री काशी विश्वनाथ, माता पार्वती और माता की गोद में बैठे प्रथमेश श्री गणेश की चल रजत प्रतिमा के दर्शन का सिलसिला देर शाम तक चला। महिलाएं विदाई के गीत गा रही थीं। जैसे ही बाबा विश्वनाथ की पालकी गली में उतरी तो भक्तों ने गगनचुंबी जयकारे लगाकर उनका स्वागत किया। बाबा की पालकी को छू लेने और कंधा देने के लिए भक्तों में होड़ मची रही। हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए भक्त बाबा की पालकी लेकर विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में पहुंचे। फिर गौने की रस्म शुरू हुई। भक्त बाबा की एक झलक पाने को बेताब थे तो वहीं पुलिसकर्मी उन्हें धकिया कर उनसे दूर करने की कोशिश में भी लगे रहे।
महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि इस साल जिस तरह से जम्मू कश्मीर में आतंकी हमला हुआ जिसमें हमारे 40 जवान शहीद हुए तो उनकी आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की गई। साथ ही भारत समेत समूची दुनिया में शांति और अमन चैन की कामना भी की गई। मान्यता है कि बाबा की पालकी यात्रा का दर्शन करने के लिए देव लोक से सभी देवी-देवता भी पधारते हैं।