वाराणसी। बीएचयू में चल रहे पांच दिवसीय अंतर संकाय युवा महोत्सव ‘स्पंदन’ के तीसरे दिन सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने कला का जादू बिखेरा। एंफीथिएटर मैदान में नृत्य प्रतियोगिता में लोक नृत्य की प्रस्तुतियों पर खूब तालियां बजीं। वहीं, ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में सितार, सारंगी, वायलिन और तबले की जुगलबंदी से कलाकारों ने अमिट छाप छोड़ी।
छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह और कार्यक्रम संयोजक प्रो. जेके रॉय के निर्देशन में तीसरे दिन के कार्यक्रम की शुुरुआत स्वतंत्रता भवन में लघु नाटिका से हुई। इसमें 22 टीमों ने भागीदारी की। प्रतिभागियों ने पुलवामा हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। अहिंसा की परम धर्म और पर्यावरण संरक्षण आदि पर नाटक का मंचन किया।
उधर, एंफीथिएटर मैदान में नृत्य प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पंजाबी, गुजराती, राजस्थानी लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। खूब तालियां भी बजीं। उधर पं. ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में वादन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने संतूर, वायलिन, माऊथ आर्गन, बांसुरी वादन कर जीत की दावेदारी रखी। उप शास्त्रीय गायन में 22 प्रतिभागियों ने सुरों से समां बांधा। विज्ञान संस्थान के व्याख्यान कक्ष में हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत वाद-विवाद प्रतियोगिता में जीवन की कामना-सुख या शांति विषय पर विचार रखे।
आतंकवाद खात्मे का दिया संदेश
दृश्य कला संकाय में आयोजित पोस्टर मेकिंग कंप्टीशन के माध्यम से प्रतिभागियों ने अलग-अलग चित्रों के माध्यम से आतंकवाद को खत्म करने का संदेश दिया। साथ ही आन द स्पाट फोटोग्राफी में प्रकृति और रंग विषय पर फोटोग्राफी कला का प्रदर्शन किया।
आकर्षक मेहंदी सजाई
मेहंदी प्रतियोगिता में विभिन्न संकायों की 17 प्रतिभागियों ने भागीदारी की। ‘दुल्हन’ शीर्षक पर आयोजित प्रतियोगिता में मेहंदी से हाथों पर आकर्षक डिजाइन बनाकर निर्णायकों का ध्यान खींचा।