वाराणसी। हमारा पैर तो भगवान ने छीन लिया और आप ऐसा क्यों बनना चाहते हैं। घर पर आपके बच्चे आपका इंतजार कर रहे हैं, धीरे चलिए और सुरक्षित रहिए। मंगलवार को गोदौलिया चौराहे पर कानपुर से आए पांच दिव्यांगों ने लोगों को अपना इतिहास बताते हुए उन्हें नियमों का पालन करने की सीख दे रहे थे। उनका कहना था कि उन्होंने तो जो खोना था खो दिया है, आगे कोई हमारे में जैसा न बने। शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए यातायात पुलिस ने एक नई पहल शुरू की है। पुलिस दिव्यांगों की मदद से यातायात व्यवस्था को सुलभ बनाने के साथ ही लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करेगी। मंगलवार को गोदौलिया चौराहे से इसकी शुरूआत हुई। कानपुर से आए पांच दिव्यांगों ने मंगलवार को गोदौलिया पर करीब चार घंटे तक यातायात व्यवस्था को सुुचारु रूप से संचालन करने में मदद की। उन्हें लाउड हेलर, सीटी आदि चीजें दी गई थीं। उनके साथ सीओ यातायात राकेश नायक समेत यातायात पुलिसकर्मी मौजूद थे। आने वाले दिनों में पचास दिव्यांगों को अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी लगाई जाएगी।
सीओ यातायात राकेश नायक की पहल पर कानपुर निवासी राम कुमार गुप्ता, जगत सिंह, गंगा सागर, आलोक कुमार और उमाकांत सोमवार की शाम वाराणसी पहुंच गए थे। ये सभी मंगलवार की सुबह 11 बजे राकेश नायक के साथ गोदौलिया पहुंचे। सभी को ट्रैफिक ब्रिगेड की यूनिफार्म उपलब्ध कराई गई थी। सभी को चौराहे के आसपास खड़ा किया गया। जो भी गलत साइड से जाता दिखा दिव्यांग उन्हें रोककर समझाते और यातायात नियमों का पालन करने को कहते। पुलिस के साथ काम करने से दिव्यांगों का मनोबल भी बढ़ा हुआ था। लाउड हेलर के जरिए भी वो लोगों को यातायात नियमों के बारे में बता रहे थे। पांच दिव्यांगों की मदद में दस स्थानीय दिव्यांग भी पहुंच गए। इसका असर भी देखने को मिला। गोदौलिया चौराहे पर मंगलवार को जाम नहीं लगा। इस नई व्यवस्था से वाहनों से चेकिंग करने के नाम वसूली करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी लगाम लगेगी। राकेश नायक ने बताया कि 50 अन्य दिव्यांगों का प्रशिक्षण जल्द से शुरू होगा। ये 50 दिव्यांग भी पुलिस की मदद से शहर की यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद करेंगे। ट्रैफिक संभालने के साथ ही दिव्यांग लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूकता का संदेश भी देंगे। बताया कि 40 दिव्यांगों का वेतन एक संस्था की निधि अग्रवाल और दस का जयपुरिया गेस्ट हाउस के लोग वहन करेंगे। एक दिव्यांग को महीने में दो हजार मानदेय और भोजन मिलेगा।