भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन महावीर प्रताप उर्फ राजा शर्मा ने कहा कि जीएसटी से प्रभावित कालीन उद्योग में 20-30 प्रतिशत तक रोजगार में कमी दर्ज की गई है। जीएसटी से लड़खड़ाए उद्योग को रफ्तार देने के लिए जरूरी है कि जॉब वर्क पर जीएसटी शून्य किया जाए। जर्मनी के हनोवर में हुए डोमोटेक्स फेयर में भाग लेकर लौटे चेयरमैन ने वस्त्र मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फेयर में भारतीय कालीन की खूब प्रशंसा हुई लेकिन उसका स्तर बनाए रखने के लिए हमें एक नीति बनाकर आगे बढ़ना होगा।
चेयरमैन ने बताया कि लगभग 47 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अमरीका भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा खरीदार है। बताया अमरीका में 3.2 प्रतिशत मांग बढ़ी है। वहीं, यूरोपीय संघ के विघटन के बाद ब्रिटेन भी आवास क्षेत्र में संतोषजनक वृद्धि कर रहा है, जो भारतीय कालीन के लिए अच्छे संकेत हैं। बताया कि डोमोटेक्स फेयर में भारत के 200 से अधिक निर्यातकों ने करीब 25 प्रतिशत हिस्से में अपने फ्लोर कवरिंग प्रस्तुत की। इससे हमें न केवल नए देशों से खरीदार मिले बल्कि करोड़ों रुपये का व्यापार भी हुआ।
चेयरमैन ने बताया कि आगामी वर्षों में कालीन उत्पादन और व्यापार बढ़ाने के लिए सीईपीसी की वेबसाइट को नया रूप दिया जा रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब का उपयोग भी प्रारंभ कर दिया गया है। साथ ही भारत के शिल्पियों, कारीगरों और बुनकरों के प्रदर्शन पर फिल्म बनाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय कालीन की चीन में बिक्री बढ़ाने के लिए सीईपीसी ने वहां की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी को अपने साथ जोड़ा है। शीघ्र ही निर्यातकों के लिए गोदाम खोलने पर भी विचार हो रहा है।