वाराणसी। शारीरिक व्याधियों को दूर करने के लिए शास्त्रों में मंत्र, मणि, औषधि तीन उपचार उल्लेखित हैं। प्रत्येक ग्रहों के लिए अलग अलग रत्नों को धारण करना चाहिए। किसी भी रत्न को धारण करने से पहले अपनी कुंडली को किसी प्रमाणिक ज्योतिषी से दिखालें। उक्त बातें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय ने कहीं। वह रविवार को चेतमणि चौराहा भेलूपुर स्थित नारायणदास सर्राफ एंड संस की ओर से ग्रहरत्न कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि ग्रहाें के कुप्रभाव को दूर करने के लिए रत्न धारण करने की प्रति लोगों की जिज्ञासा बढ़ती जा रहीं है। प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की भ्रांतियां व जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम का शुभारंभ शोरूम के अधिष्ठाता अमित अग्रवाल ने दीपप्रज्जवलन एवं अतिथियों को माल्यार्पण से स्वागत करके किया। इस मौके पर विशन देवी, डा. बैद्यनाथ प्रसाद, गजल अग्रवाल, मनीष तिवारी, डा. अजय अग्रवाल, धारा अग्रवाल, डा. मधु अग्रवाल, रश्मि अग्रवाल, धारा अग्रवाल, डा. हिमांशु, हरेकृष्ण अग्रवाल, गुलशन कपूर, श्याम सुन्दर प्रसाद आदि मौजूद रहे।
इनसेट
किस ग्रह के लिए क्या पहनें-
सूर्य के लिए माणिक्य, चंद्रमा के लिए मोती, मंगल के लिए मूंगा, बुध के लिए पन्ना व उपरत्न में मरगज, बृहस्पति के लिए पुखराज, शुक्र के लिए हीरा (किसी भी ग्रह के लिए कारगर),शनि के लिए नीलम व उपरत्न जमुनिया, राहू के लिए गोमेद और केतु के लिए लहसुनिया