वाराणसी। केंद्रीय विद्यालय के बच्चों को अब किताबी ज्ञान के साथ-साथ अलग-अलग प्रेरक कहानियों के माध्यम से भी पढ़ाया जाएगा। समय-समय पर पाठयक्रमों में हो रहे बदलाव की वजह से दबाव कम करने और बच्चों के व्यक्तित्व विकास के उद्देश्य से ही यह फैसला लिया गया है। इसके लिए बुधवार से तीन दिवसीय कार्यशाला की शुरूआत हो गई। कार्यशाला में बनारस और आसपास के जिलों से आए शिक्षकों ने अलग-अलग कहानियां बताई।
पद्मभूषण अमृतलाल नागर के जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से चल रही कथा वाचन कार्यशाला के पहले दिन उपायुक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन डीटीएस राव ने कहा कि कहानियां जीवन की मुख्य धरोहर होती है। कोई भी शिक्षक कहानियों के माध्यम से विषय वस्तु को रुचिकर बनाकर सहज ढंग से उसका प्रभाव छात्रों के मस्तिष्क पर छोड़ सकता है। संचित स्मृतिन्यास की संरक्षिका शिक्षाविद डॉ. दीक्षानागर ने कहा कि शिक्षा के बदलते पाठयक्रम से बच्चे ऊबने लगे हैं। कहानी के माध्यम से पढ़ाई एक ऐसी कला है जो बच्चों के व्यक्तित्व विकास के साथ ही मनोवैज्ञानिक रुप से सहायक होती है। विद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम सिंह ने इस तरह की कार्यशालाओं को बच्चों के विकास के लिए जरूरी बताया। कार्यक्रम में मीनाक्षी जैन, विभा नागर, ललित सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।