वाराणसी। गुडवर्क दिखाने के चक्कर में सारनाथ पुलिस ने मवइयां से तीन ट्रक पकड़े लेकिन अपनी जीडी में सिर्फ एक ट्रक दिखाया। बाकी दो ट्रकों की खोजबीन में उनके मालिक पिछले तीन वर्षों से परेशान हैं। दोनों ट्रकों के मालिकों ने एसएसपी से लेकर डीएम तक के यहां फरियाद लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गुरुवार को इस मामले में अदालत में प्रकीर्णवाद दर्ज किया गया। अदालत ने सारनाथ पुलिस से आख्या तलब की है।
आदमपुर निवासी विजय कुमार यादव की आशापुर में मार्बल की दुकान है। उनके तीन ट्रक भी चलते हैं। 16 जून 2014 को सारनाथ थानाध्यक्ष ने मवइयां में छापेमारी कर ट्रक (यूपी 65 आर 7255) से शराब बरामद कर उसे सीज कर दिया। ट्रक मालिक विजय का आरोप है कि पुलिस मौके से तीन ट्रक ले गई थी लेकिन चालान केवल एक का किया। बाकी दो ट्रकों (यूपी 65 बीटी 2070 और यूपी 65 बीटी 3450) की उन्होंने कोई लिखा पढ़ी नहीं की थी। इस बीच उन्होंने कई पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। एसएसपी के निर्देश पर अगस्त 2017 में सीओ कैंट ने जांच रिपोर्ट दी कि ट्रक (यूपी 65 बीटी 2070) रामनगर में एक वाहन एजेंसी के यार्ड में खड़ा है। पुलिस की ओर से दलील दी गई कि ट्रक के खिलाफ अदालत ने वारंट जारी किया था, जिस पर ट्रक को बरामद कर फाइनेंसर को सौंप दिया गया। विजय का कहना है कि उनका फाइनेंसर से कोई विवाद नहीं है। तीसरा ट्रक (यूपी 65 बीटी 3450) का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है। विजय यादव की ओर से गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 156-3 के तहत मुकदमा दर्ज करने के लिए आवेदन किया गया। इस मामले में अदालत ने प्रकीर्णवाद दर्ज करते हुए सारनाथ थानाध्यक्ष से आख्या तलब की है।