फैसले पर जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी
फ्यूल चार्ज के नाम पर बिजली बिल में बढ़ोतरी का फैसला उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। नियामक आयोग की वाराणसी में हुई जनसुनवाई के दौरान भी आपत्ति जताते हुए ऐसा न करने की अपील की थी। इसके बाद भी उपभोक्ताओं का ध्यान नहीं रखा गया। फैसले के खिलाफ नियामक आयोग में सोमवार को याचिका दायर करेंगे। हर हाल में पावर कार्पोरेशन को फैसले को वापस लेना ही होगा। - अवधेश वर्मा, अध्यक्ष, राज्य उपभोक्ता परिषद, यूपी
देश से बदतर उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति है। जनता को महंगाई की बड़ी मार है। आगे आगे देखिए होता है क्या यही रामराज है। अमीर ओर अमीर, गरीब और गरीब होता जाएगा। एक भी ऊर्जा के संयंत्र भाजपा ने नहीं लगाए, जो लगे हैं वे सब सपा और कांग्रेस की देन है। - वीरेंद्र सिंह, सपा सांसद चंदौली
एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखने वाली यूपी सरकार को बिजली की दरें बढ़ाने से पहले पुनर्विचार करना चाहिए। एमएसएमई वेंटिलेटर पर है, बिजली मिल नहीं रही है कटौती भयंकर हो रही है। किसानों और व्यापारियों की कमर टूट जाएगी। आम जनता प्रताड़ित होगी। - अजय राय, प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश कांग्रेस
उद्योगों की यूनिटें पहले से ही संकट में हैं। किसी भी प्रकार का भार यूनिट बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। बिजली की दरें बढ़ने से यूनिट खत्म होंगे। सरकार और आयोग जो छेद हैं उसे दुरुस्त करें। लाइन लॉस कम करें और वसूली बढ़ाएं। इस समय उद्योग संघर्ष कर रहे हैं। एक पैसे की बढ़ोतरी यूनिट सहन नहीं कर पाएंगे। - आरके चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
पश्चिम एशिया के तनाव के चलते एमएसएमई की यूनिटें संकट में हैं। ऐसे में इंडस्ट्री की प्राणवायु बिजली के दामों में बढ़ोतरी यूनिटें डुबा सकती हैं। पड़ोस में बिजली सस्ती हैं। सरकार को विचार करना चाहिए। एमएसएमई को सहायता की जरूरत है। ऐसे में ये बढ़ोतरी संजीवनी साबित नहीं होंगी। - दीपक कुमार बजाज, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन रामनगर