पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से उत्तर प्रदेश की बौद्ध पर्यटन पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि यामानाशी प्रांत के प्रतिनिधिमंडल का सारनाथ आगमन भारत और जापान के सदियों पुराने बौद्ध एवं सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है। इससे जापान के अधिक से अधिक पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध बौद्ध विरासत, ऐतिहासिक स्थलों और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराने में भी मदद मिलेगी।
जापानी प्रतिनिधिमंडल की सदस्य युमी साइटो ने सारनाथ यात्रा को अपने लिए बेहद खास अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में मान्यता मिलने के बाद सारनाथ की पावन धरती पर पहुंचना और भी विशेष रहा। भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश से जुड़े स्थलों का भ्रमण करने के साथ धामेक और चौखंडी स्तूप को करीब से देखना, भारत और जापान के सदियों पुराने साझा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को महसूस करने जैसा अनुभव था।
इस यात्रा ने उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बौद्ध, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई संभावनाओं को भी रेखांकित किया। बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ अब तेजी से प्रदेश की बौद्ध विरासत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। यहां पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों की बढ़ती रुचि से सारनाथ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिल रही है।