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UP: 18 हजार अमेरिकी नागरिकों से लूटे 72 करोड़, चीन के रास्ते पैसा आता था भारत; पढ़ें कॉल सेंटर का कारनामा

Fri, 05 Sep 2025 05:57 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी के रोहनिया इलाको में स्थानीय थाने की पुलिस और साइबर क्राइम की टीम में छापा मारकर 29 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। यहां कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। यहीं से फोन करके शातिर विदेशों में बैठे लोगों को ठग लिया करते थे।
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पुलिस ने काॅल सेंटर पर मारा छापा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी में बैठकर अमेरिकी नागरिकों से गिफ्ट कार्ड और ऑनलाइन लूटपाट करने वाले छह राज्यों के 29 साइबर अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यहां 6 महीने से चल रहे कॉल सेंटर से 18 हजार अमेरिकियों से कुल 72 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की गई है। हर महीने 3000 अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जाता था। हर एक से 40 हजार रुपये का गिफ्ट कार्ड और महीने का कुल टारगेट 12 करोड़ रुपये रहता था। चीन के लोगों की मदद से हवाला के माध्यम से पैसा भारत में आता था।

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आरोपियों में सबसे ज्यादा पूर्वोत्तर के 14, गुजरात के छह, महाराष्ट्र के 4, पंजाब-हरियाणा के चार और एक राजस्थान का है। सरगना कौशलेंद्र तिवारी मोहाली पंजाब का रहने वाला है। उसकी उम्र महज 25 साल है। पुलिस ने बुधवार को छापा मार कर इन्हें गिरफ्तार किया। गुरुवार को थाना रोहनिया और साइबर क्राइम कमिश्नरेट वाराणसी की संयुक्त पुलिस टीम द्वारा पुलिस लाइन सभागार में इसका खुलासा किया। 

पुलिस ने की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार रोहनिया थाना के अखरी चौकी के अंतर्गत जीन पब्लिक स्कूल के भवन में पूरी रात लाइटों का जलना और इन 29 लड़कों का आना-जाना क्षेत्रीय लोगों के संदेह का कारण बना। लोगों ने पुलिस को सूचना दी तो जांच करने पर शहर के चौथे और सबसे बड़े फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ।

सूचना है कि अमेरिकी दूतावास, रॉ और विदेशी एजेंसियां भी जांच करने बनारस आ सकती हैं। हालांकि एडीसीपी नीतू कादियान ने कहा कि वाराणसी पुलिस इसमें एटीएस, सीबीआई और आईबी जैसी एजेंसियों से भी मदद लेगी। डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार ने बताया कि मौके से ऑनलाइन फ्रॉड करने में इस्तेमाल किए जा रहे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, 24 मोबाइल फोन और सात फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए। बीएनएस 66 और आईटी एक्ट की धारा लगाई गई है। इसे बढ़ाया भी जाएगा।

डार्क बेव से मिला अमेरिकियों का यूनिक नंबर
डार्क वेब से अमेरिकी लोगों का एसएसएन सोशल सिक्योरिटी नंबर का डेटा निकालते थे। ये एसएसएन आधार कार्ड की तरह होता है। कॉल सेंटर एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम करने वाले लड़के अमेरिकियों से फ्लूएंट अंग्रेजी में बातचीत कर कहते थे कि आप लोग वॉलमार्ट का गिफ्ट कार्ड लेकर आईए। उस पर एक नंबर होता है। जिससे कोई भी पेमेंट कर सकते हैं। ये सारे गिफ्ट कार्ड इकट्ठा कर चीन के वेंडर को दे देते थे। वो इनको कैश में हवाला के माध्यम से पैसे भेजता था। एक-एक से कम से कम 500 यूएस डॉलर निकालते थे।

पुलिस ने की कार्रवाई। - फोटो : अमर उजाला
ई सिम से करते थे वीपीएन प्रोटेक्टेड कॉल
एडीसीपी नीतू कादियान ने बताया कि ये लड़के जो भी कॉल करते थे वो वीपीएन प्रोटेक्टेड थे। ई सिम का इस्तेमाल किया गया था। सिंगापुर का वीआई सीआई नाम का कॉलर था। उस पर यूजर नेम और पासवर्ड का लिंक क्रिएट करते हैं। उसी को मेन सर्वर मानते हुए नंबर डायल करते हैं। ये वीपीएन प्रोटेक्टेड नंबर से कोई भी क्रिडेंशियल आसानी से नहीं मिलेंगे। उसके स्पेशल मांग से ही पूरी तहकीकात हो सकेगी।

पहले तीन कॉल सेंटर की ठगी से बिल्कुल अलग
नीतू कादियान ने बताया कि हर महीने का ये आंकड़ा 3000 विदेशियों को भी पार कर सकता है। आगे की जांच जारी है। क्योंकि इनके डिवाइस में ऑटो डिलीट का विकल्प था। यह बेहद व्हाइट कॉलर क्राइम है। बाकी एजेंसी की भी मदद ली जा रही है। ये ठगी बनारस में हुए पहले की तीन कॉल सेंटर की ठगी से बिल्कुल अलग है। पूर्वांचल में सिर्फ बनारस से ही ऐसा चल रहा है।

चाइल्ड अश्लीलता और पार्सल में ड्रग्स केस में फंसाने का देते थे झांसा
पुलिस की पूछताछ में कॉल सेंटर से साइबर ठगी मामले में बिटक्वाइन में भी पैसे लेने की बात सामने आई है। नहीं मानने पर पार्सल में ड्रग्स, चाइल्ड अश्लीलता कंटेंट का भी झांसा दिया जाता था। बाहरी कंपनी से कॉलिंग पोर्टल खरीदकर लॉगिन किया जाता था। इससे विदेशी नागरिकाें के नंबर मिल जाते थे। उसी पोर्टल से विदेशी नागरिकों के मोबाइल नंबररों पर आईवीआर कॉल जनरेट करते थे।

यह अमेजॉन, फ्लिपकार्ट आदि प्लेटफॉर्म पर की गई खरीदारी और उसकी डिलीवरी कंफर्मेशन से संबंधित होती थी। आईवीआर कॉल फर्जी होती है इसलिए विदेशी नागरिक इन उत्पादों को लेने से से पहले इन्कार कर देते हैं। फिर ऑफिस में बैठे डायलर के द्वारा फोन पर बातचीत कर पार्सल में ड्रग्स और चाइल्ड अश्लीलता का झांसा दिया जाता था। तब जाकर अमेरिकी इनके चंगुल में फंस जाते थे।
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सभी लड़कों का टेक्निकल और इंजीनियरिंग बैकग्राउंड
रात 10 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक काम करते थे। इसी से संदेह हुआ। इनको हर महीने 35 से लेकर 40 हजार रुपये दिए जाते थे। मैनेजर कौशलेंद्र ही सभी को डेटा और सैलरी देता था। सभी लड़कों का टेक्निकल और इंजीनियरिंग बैकग्राउंड है। उनकी इंग्लिश स्पीकिंग बहुत अच्छी है।

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