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बीमारियों पर नियंत्रण में आयुर्वेदिक पद्धति ही उपयोगी

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वाराणसी। बीएचयू आयुर्वेद संकाय में चल रहे तीन दिवसीय आयुर्वेद वर्ल्ड कांग्रेस के अंतिम दिन वक्ताओं ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। अलग-अलग सत्रों में बीमारियाें के कारण और उसके आयुर्वेदिक उपचार पर चर्चा की गई। बतौर मुख्य अतिथि निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि कुमार ने कहा कि विभिन्न बीमारियों के नियंत्रण में आयुर्वेदिक पद्धति उपयोगी है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए सभी को आगे आना होगा।
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स्वतंत्रता भवन में आयोजित समापन समारोह में ब्रह्मर्षि कुमार ने कहा कि आयुर्वेद के जनक भगवान ब्रह्म हैं। मधुमेह हो या अन्य बीमारियां, जितनी तेजी से बढ़ रही है, इसका इलाज केवल आयुर्वेद ही है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में जांच होती है लेकिन बीमारी का पूर्ण इलाज नहीं हो पाता है। ऐसे में आयुर्वेदिक पद्धति बहुत असरदार है। आयुष निदेशक डॉ. चंद्रकेतु ने आयुर्वेद के विकास में वर्ल्ड कांग्रेस जैसे आयोजनों को बेहतर प्रयास बताया। धारावाहिक रामायण के राम की भूमिका निभाने वाले टेलीविजन कलाकार अरुण गोविल ने कहा कि आयुर्वेद का विकास केवल कहने से नहीं बल्कि इसे व्यवहारिक जीवन में अपनाने से होगा। संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी ने चिकित्सकों के साथ ही आयोजन में सहयोगी कंपनियों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया और सभी के प्रति आभार जताया। अतिथियों का स्वागत प्रो. वीपी सिंह और अध्यक्षता प्रो. जीपी दूबे ने किया। इस दौरान प्रो. सीबी झा, प्रो. जेएस त्रिपाठी, वैद्य सुशील दूबे, डॉ. ममता तिवारी, डॉ. एके द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
स्वतंत्रता भवन परिसर में लगे स्वास्थ्य मेले में शहर के विभिन्न जगहों से आए लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें जरूरी दवाइयां भी दी गई। इसमें लोगों ने मधुमेह, हृदय रोग, सर्दी, खांसी आदि की जांच कराई। अंतिम दिन सीआरपीएफ के जवानों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। संकाय प्रमुख की ओर से जवानों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया गया।
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