लखनऊ/वाराणसी। नदियां आदि काल से ही मानव सभ्यता की जीवन रेखा रही हैं। नदियों को जीवित रखकर ही अगली पीढ़ी के जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है। अगर नदियाें का अस्तित्व समाप्त हो
गया तो मानव जीवन भी समाप्त हो जाएगा। इन्हें जीवित रखने के लिए स्थानीय लोगों को जोड़कर जनांदोलन का रूप दिया जाना चाहिए। ये बातें ग्राम्य विकास आयुक्त एनपी सिंह ने नदियों के संरक्षण और पुनरुद्धार की बैठक में बुधवार को कही। उन्होंने वरुणा नदी पर सर्वे का काम पूरा न होने पर वाराणसी के अधिकारियों पर नाराजगी भी जताई। ग्राम्य विकास आयुक्त एनपी सिंह बुधवार को अपने कार्यालय सभाकक्ष में टेढ़ी, मनोरमा, पांडु, वरुणा, ससुर खदेड़ी, भैसंटा (सई), गोमती और अरिल नदियों के पुनरुद्धार के संबंध में आठ मंडलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि एनजीटी के दायरे में रहकर ही अधिकारी कार्य करें। प्रयागराज, मिर्जापुर और वाराणसी मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त व अधीक्षण अभियंता सिंचाई को एक सप्ताह के अन्दर सर्वे का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। ग्राम्य विकास आयुक्त कहा कि पुनरुद्धार के लिए चिह्नित सभी नदियों का पूरा ब्यौरा तैयार करें। नक्शे के अनुसार ही कार्य करें। उन्होंने कहा कि अब नदियों के पुनरुद्धार की बैठक मंडल स्तर पर होगी। चिह्नित नदियों के पुनरुद्धार कार्य का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा।