वाराणसी। लखनऊ जेल में निरुद्ध पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ दशाश्वमेध थाने में दर्ज रंगदारी के मुकदमे की विवेचना तीन विवेचकों ने की। शुरुआत के दो विवेचकों ने अपनी विवेचना में गायत्री को आरोपी माना। मगर, तीसरे विवेचक यानी निलंबित इंस्पेक्टर बालकृष्ण शुक्ला ने गायत्री को आरोपी नहीं माना और गिरफ्तार किए गए दो सह अभियुक्तों के शपथ पत्र के आधार पर विवेचना में नाम बाहर निकाल दिया। इस पर तत्कालीन दशाश्वमेध सीओ अभिनव यादव ने आपत्ति भी जताई, लेकिन इसकी जानकारी एसएसपी को नहीं दी। इसे लेकर माना जा रहा है कि जांच की आंच उन पर भी आएगी।
जंगमबाड़ी निवासी फर्नीचर व्यापारी की तहरीर पर गायत्री के खिलाफ 30 जून को दशाश्वमेध थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। दशाश्वमेध थाने के इंस्पेक्टर रहे बालकृष्ण शुक्ला ने विवेचना के दौरान गायत्री को आरोपी नहीं माना और प्रकरण एसएसपी के संज्ञान में आ गया। इस पर एसएसपी ने इंस्पेक्टर बालकृष्ण शुक्ला को निलंबित कर विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी। क्राइम ब्रांच की टीम केस डायरी का अध्ययन कर रही है। एसपी क्राइम ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद ने बताया कि केस डायरी के आधार पर बाकी की कार्रवाई सही है। विवेचना से सिर्फ गायत्री प्रसाद प्रजापति का नाम निकाला गया है। विवेचक को कहा गया है कि सुसंगत साक्ष्यों के आधार पर विवेचना में नाम शामिल कर अदालत में जल्द चार्जशीट दाखिल करें। उधर, पूरे प्रकरण की जांच कर रहे एसपी ग्रामीण अमित कुमार ने बयान दर्ज करने के लिए तीनों विवेचकों और पर्यवेक्षण अधिकारियों को बुलाया है।