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‘भागवत कथा सुनने से प्राप्त होता है देवत्व’

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वाराणसी। बाल व्यास पं. श्रीकांत शर्मा ने कहा कि सबके हृदय में परमात्मा का निवास है, यहीं भागवत का दर्शन है। श्रीमद्भागवत अजर-अमर ज्ञान की कथा है। यदि समस्त पाप-ताप का क्षय करना है तो प्रभु को सर्वस्व समर्पित कर दो। भागवत निवृत्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। काशी में रहकर भागवत सुनना साक्षात देवाधिदेव महादेव के श्रीमुख से कथा श्रवण करने के समान है। उन्होंने कहा कि देवताओं और असुरों में अमृत पीने की होड़ थी लेकिन वास्तविकता यह है कि अमृत पीने से पुण्य क्षीण होता है और कथा श्रवण करने से देवत्व की प्राप्ति होती है।
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काशी सत्संग सेवा समिति की ओर से शनिवार को नाटी इमली के भरत मिलाप मैदान में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन बाल व्यास ने भागवत की महिमा का बखान किया। कहा कि मन को कभी जबरदस्ती भगवान की तरफ मत ले जाओ, उसे कथा, भजन से भेंट कराओ वह स्वत: प्रभु शरण में चला आयेगा। यदि तब भी भगवत भक्ति में मन ना रमे तो उसे ईश्वर के भरोसे छोड़ दो, वह स्वयं मार्ग दिखा देंगे।
कथा के पूर्व रामकटोरा स्थित श्रीराणीसती दादी मंदिर से कथा स्थल तक भव्य पोथी यात्रा निकाली गई। कथा यजमान दीपक बजाज, मनोज बजाज पोथी लेकर चल रहे थे। शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कथा के दौरान दीनानाथ झुनझुनवाला, चम्पालाल सरावगी, शिव कुमार लोहिया, कमलेश बाजोरिया, महेश चैधरी, सत्यनारायण झुनझुनवाला, अवधेश खेमका, सुरेश तुलस्यान, विजय मोदी, पवन अग्रवाल, अजय खेमका, श्रीनारायण खेमका आदि उपस्थित रहे।
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