ज्ञानपुर। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कर्जमाफी योजना का लाभ जिले में शत प्रतिशत किसानों को नहीं मिल सका। जिले में ढाई हजार से अधिक किसान सत्यापन के बाद भी कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। विभाग का दावा है कि सत्यापन के बाद शासन को संभावित बजट की मांग की गई है, बजट आते ही कर्जमाफ हो जाएगा।
सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिले में 22 हजार किसानों को कर्जमाफी के लिए चिन्हित हुए। तीनों तहसीलों में सत्यापन के बाद करीब 12 हजार किसानों को अपात्र कर दिया गया। इसके बाद तीन चरणों में 10 हजार किसानों का एक-एक लाख कर्जमाफ हुआ। लेखपाल संग राजस्व विभाग के अफसरों पर सत्यापन में धांधली के आरोप लगे। जिसके मद्देनजर कृषि विभाग ने विभागीय वेबसाइट पर किसानों से शिकायत मांगी। 31 दिसंबर तक करीब ढाई हजार किसानों ने कर्जमाफी से जुड़ी शिकायत की। विभाग की ओर से ऐसे किसानों का तहसीलों से सत्यापन कराया गया। करीब माह भर से अधिक समय गुजरने के बाद भी किसान कर्जमाफी का लाभ नहीं पा सके।
जिसको लेकर किसानों में गहरी नाराजगी है। किसान नेता आरएल सिंह ने कहा कि कर्जमाफी योजना में राजस्व विभाग की ओर से व्यापक स्तर पर धांधली बरती गई, जिससे बड़ी संख्या में किसान योजना से वंचित हो गए। शासन को पत्र भेजकर इससे अवगत कराया गया है। प्रगतिशील किसान एके चौबे का कहना है कि सत्यापन के नाम पर किसानों का शोषण किया गया। सुविधा शुल्क न देने वाले किसानों के अभिलेखों को गलत दर्शाया गया। जिला कृषि अधिकारी अशोक प्रजापति ने कहा कि किसानों का सत्यापन करा शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। वहां से बजट जारी होने के बाद किसानों का कर्जमाफ हो जाएगा।