वाराणसी। डीरेका के कर्मचारी नेता ताराधीश कुमार मुकेश (35) की हत्या के विरोध में उनके साथी कर्मचारियों ने परिसर स्थित केंद्रीय चिकित्सालय के शव गृह के सामने चार घंटे धरना दिया। इस दौरान सभी ने मामले की सीबीआई जांच और हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के हत्यारोपियों की जल्द गिरफ्तारी के आश्वासन पर गुस्साए लोग माने। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बीएचयू भेजा गया।
पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को वापस डीरेका केंद्रीय चिकित्सालय के शव गृह में रखकर मुकेश के पिता देवनंदन प्रसाद के बांका से आने का इंतजार किया जा रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मुकेश के सिर, सीने में बाएं तरफ और हाथ पर नाइन एमएम की पिस्टल से सात गोली बेहद नजदीक से मारी गई हैं। डीरेका के प्लांट मेंटेनेंस शॉप में फिटर के पद पर तैनात मुकेश की मंगलवार रात 10 बजे पश्चिमी कॉलोनी स्थित उनके आवास के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
बुधवार की सुबह 11 बजे के लगभग डीरेका कर्मचारी परिषद के सदस्यों के साथ सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी केंद्रीय अस्पताल के शवगृह के सामने पहुंचे और धरने पर बैठ गए। परिषद के संयुक्त सचिव विष्णु देव दुबे ने मांग की कि डीएम और एसएसपी से बात कराकर लिखित में दिया जाए कि मामले की सीबीआई जांच होगी। धरने की सूचना पाकर एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और गुस्साए कर्मचारियों को समझाने का प्रयास शुरू हुआ। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमार्टम कराने में देरी से रिपोर्ट प्रभावित होगी। इसी बीच मुकेश के ससुर मुंगेर निवासी सूरज यादव शव गृह पहुंचे और फिर करीब तीन बजे सभी शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाने को तैयार हो गए।
नहीं पहुंचे महाप्रबंधक, कर्मचारी और विधायक नाराज
वाराणसी। डीरेका स्थित केंद्रीय अस्पताल में मुकेश की हत्या के विरोध में धरनारत कर्मचारियों ने महाप्रबंधक रश्मि गोयल के न आने पर खासी नाराजगी जताई। सभी का कहना था कि डीरेका परिवार के एक सदस्य की नृशंस तरीके से हत्या की गई और महाप्रबंधक ने मौके पर पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। वहीं, डीरेका स्थित शव गृह पर रोहनिया के भाजपा विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह भी पहुंचे थे। महाप्रबंधक के ना आने पर उन्होंने नाराजगी जताई। कहा कि महाप्रबंधक की इस संवेदनहीनता की शिकायत वो रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा से करेंगे। साथ ही कहा कि डीरेका परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की क्वालिटी गुणवत्ता युक्त नहीं है। डीरेका में ठेकेदार और अधिकारियों का गठजोड़ चल रहा है। सभी गेट पर आरपीएफ के जवानों की संख्या बढ़ाई जाए और मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।