वाराणसी। हाईवे किनारे बिना लेआउट और नक्शा पास कराए कॉलोनियों को विकसित करने का खेल धड़ल्ले से जारी है। अनियोजित और अनियंत्रित विकास पर लगाम कस पाना वीडीए के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। वजह, बिना नक्शा और अप्रूवल के प्लाटिंग करने वाले डेवलपर्स का गठजोड़ स्थानीय स्तर से शासन तक है। खुद वीडीए के कई अधिकारी-कर्मचारी भी इस गठजोड़ में शामिल हैं। इस गठजोड़ का तोड़ वीडीए के पास नहीं है। नतीजतन, शहरी क्षेत्र में तो चोरी-छिपे धड़ल्ले से निर्माण हो ही रहा है, शहर के बाहरी इलाके में भी अनियोजित विकास की चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे ने जुलाई-अगस्त में एनएच-2 पर मोहनसराय से अलीनगर के बीच रामनगर और टेंगरामोड़ के पास कार्रवाई कर उन डेवलपर्स के कार्यालयों को ध्वस्त कराया था, जो वीडीए से अप्रूवल लिए बिना कॉलोनियां बस रहे थे। इसमें जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी मगर छह महीने बाद वहां से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके चलते वीडीए के ही कुछ अधिकारियों और डेवलपर्स की मिलीभगत से वाराणसी- आजमगढ़, गोरखपुर और जौनपुर हाईवे किनारे गांवों में भी बिना लेआउट की अवैध कॉलोनियां विकसित होती गईं। यह सिलसिला अब भी जारी है। वीडीए के सूत्रों का कहना है कि डेवलपर्स, भूमाफिया की शासन और सत्ता में मजबूत पकड़, अफसरों से सांठगांठ के चलते शिकंजा कस पाना मुश्किल हो रहा है। हालांकि वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे का दावा है कि अनियोजित विकास किसी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा। अवैध कॉलोनियां बसाने और प्लाटिंग करने वालों पर कार्रवाई जारी है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।