वाराणसी। वाराणसी से हल्दिया के बीच गंगा में जल परिवहन की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को मूर्तरूप देने के लिए भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने कार्यों में तेजी ला दी है। 1390 किलोमीटर लंबे जलमार्ग को तीन भाग में बांटकर ड्रेजिंग कराई जाएगी। इस पर 1400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आईडब्ल्यूएआई के वाइस चेयरमैन प्रवीर पांडेय ने सोमवार को यहां बताया कि आगामी जनवरी या फरवरी से गंगा में ड्रेजिंग शुरू करा दी जाएगी। इसकी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। रामनगर में निर्माणाधीन मल्टी मॉडल टर्मिनल 2019 तक बनकर तैयार हो जाएगा।
टर्मिनल के निर्माण का जायजा लेने के बाद उन्होंने बताया कि हल्दिया से फरक्का, फरक्का से बाढ़ (पटना) और बाढ़ से रामनगर (वाराणसी) तक तीन चरणों में ड्रेजिंग कराई जाएगी। बताया कि 1500-2000 टन तक के मालवाहक जलपोतों के आवागमन लिए गंगा की गहराई कम से कम ढाई से तीन मीटर तक बढ़ानी होगी। जलपरिवहन के लिए जल्द ही चैनल बनाने का काम भी शुरू कराया जाएगा। विश्व बैंक से इसकी भी सहमति इसी महीने मिल जाएगी। बताया कि हर साल 54 मिलियन टन सिल्ट गंगा में आती है। इसमें से 80 फीसदी सिल्ट तो सागर में चली जाती है लेकिन 20 फीसदी सिल्ट तलहटी में जमी रह जाती है। इससे नदी की गहराई कम होती जाती है।
जल परिवहन योजना पर खर्च होने हैं 5369 करोड़
वाराणसी से हल्दिया तक जल परिवहन की योजना पर विश्वबैंक के सहयोग से कुल 5369 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। वाराणसी के अलावा हल्दिया और साहिबगंज में मल्टी मॉडल टर्मिनल निर्माणाधीन है। माल ढुलाई में सहूलियत के लिए इन सभी टर्मिनल से रेल, जल और सड़क मार्ग जुड़े रहेंगे। बताया कि टर्मिनल तैयार होने से पहले ट्रायल के तौर पर गंगा में छोटे-छोटे मालवाहक जहाज चलाए जाएंगे। अब तक रामनगर टर्मिनल का 29 फीसदी काम हुआ है।