वाराणसी। घरेलू हिंसा के मामले में आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट षष्ठं सुधाकर दुबे की अदालत ने सख्त रुख दिखाया है। अवमानना याचिका पर अदालत ने प्रकीर्ण वाद दर्ज कर नोटिस जारी करते हुए एसएसपी, जिला प्रोबेशन अधिकारी और सीओ और इंस्पेक्टर दशाश्वमेध को 20 दिसंबर को तलब किया है।
दशाश्वमेध क्षेत्र के बड़ादेव की विनय देवी के अधिवक्ता इंद्रपाल सिंह और आरके सिंह ने अवमानना याचिका दाखिल कर कहा कि अधिकारी अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं करा रहे। साथ ही, अदालत को दिग्भ्रमित करने संबंधी रिपोर्ट दे रहे हैं। दरअसल, पीड़िता को उनके बेटे रविंद्र सिंह ने वर्ष 2014 में प्रताड़ना के बाद घर से निकाल दिया था और सामान भी रख लिया था। पीड़िता ने इस मामले में घरेलू हिंसा के तहत मामला अदालत में दाखिल किया था। अदालत ने चार अगस्त को आरोपी पुत्र को आदेश दिया था कि मां को घर में शांतिपूर्वक रहने दें और उन्हें कोई परेशानी न हो। अदालत ने एसएसपी और अन्य विपक्षियों को आदेश का अनुपालन कराने को कहा था। इस बीच पीड़िता ने अदालत के आदेश की अवमानना बताते हुए याचिका दाखिल की, जिसे संज्ञान लेकर कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।
गैर इरादतन हत्या में तीन को सात साल की कड़ी कैद
वाराणसी। अपर सत्र न्यायाधीश एकादश राजेश्वर शुक्ल की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में अभियुक्त रवि गुप्त, मोहन गुप्त और मनोहर अग्रहरि को दोषी पाते हुए सात वर्ष की कड़ी कैद और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की आधी राशि मृतक की मां को दी जाएगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल सिंह और सहायक शासकीय अधिवक्ता सत्यनारायण सिंह गौतम के मुताबिक चेतगंज थाने में वादिनी मीनू मिश्रा ने तहरीर दी थी। उसका कहना था कि उसका भाई धीरज अपने कुछ दोस्तों के साथ 27 नवंबर 2011 को अग्रहरि धर्मशाला में बारात में गया था। वहां उसके भाई को शराब पिला दी गई। इस बीच डांस करने को लेकर शैलपुत्री निवासी रवि ने अपने दो साथियों के साथ धीरज को मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। बीएचयू अस्पताल में उपचार के दौरान 29 नवंबर को धीरज की मौत हो गई थी।