वाराणसी। महा भैरव अष्टमी पर शनिवार को काशी के आठ भैरवों मंदिरों का भव्य श्रृंगार हुआ। भैरव के जन्मोत्सव पर मंदिर को रुद्राक्ष, फूल, झालर से मंदिर का श्रृंगार किया गया। भैरव के प्रिय पान सुरा का भी भोग लगाया गया। दिव्य झांकी का दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ देर रात तक मंदिरों में लगी रही।
बाबा कालभैरव मंदिर में पंचामृत स्नान के बाद सवा क्विंटल दूध से अभिषेक किया गया। सिंदूर लेपन, नए वस्त्र धारण के बाद मंदिर का पट खोल दिया गया। पुजारी महेंद्र उपाध्याय ने रात 12 बजे सवा लाख बत्तियों से बाबा की महाआरती की। बाबा को 511 किलो का केक काटकर भोग लगाया गया। बड़ी पियरी स्थित चौखंडी बीर स्थित बाबा कालभैरव मंदिर में इमरती, जलेबी, पूरी, हलुआ, ऋतु फल का भोग लगाया। बाबा की शयन आरती की गई।
कमच्छा स्थित बटुक भैरव मंदिर में महंत राकेश पुरी, भास्कर पुरी की देखरेख में मंगला आरती हुई। 1008 बटुकों को भोजन के बाद अखंड भंडारे का कार्यक्रम किया गया। हवन पूजन के बाद महाआरती हुई और इसी के साथ पंचमकार भोग, मीट, मछली, पूड़ी, बारा, मंदिरा का भोग लगाया गया। रेशम कटरा स्थित कोडमेश्वर भैरव का श्रृंगार हुआ। रतन कसेरा की देखरेख में पूजा अर्चना हुई। लाट भैरव पर अन्नकूट श्रृंगार किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम और भंडारे के बाद 1008 दीपों से आरती की गई। लाट भैरव प्रबंध समिति के अध्यक्ष हरिहर पांडेय की देखरेख में पूजा अर्चना की गई।