न्यू कॉलोनी सोयेपुर निवासी निर्मला का कहना है कि अप्रैल में जब से मीटर बदला गया है, तब से नियमित बिल नहीं आ रहा है। कई बार उपकेंद्र पर फोन करने के बाद भी सही जानकारी नहीं मिलती है। अर्दली बाजार निवासी केके कुरैशी को भी स्मार्ट मीटर बदलने के बाद बिल का इंतजार करना पड़ रहा है।
बिजली कर्मचारियों ने उठाए सवाल : बिजली निगम के कर्मचारियों ने भी पुराने मीटर को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने पर सवाल खड़ा किया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले कार्यालयों पर पिछले दिनों प्रदर्शन कर कर्मचारियों ने बताया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के बाद उतारे जाने वाले मीटर की रीडिंग में जिस तरह से गड़बड़ी की जा रही है, उससे विद्युत वितरण निगमों का हजारों करोड़ का नुकसान हो सकता है।
समिति के मीडिया सचिव अंकुर पांडेय का कहना है कि सीतापुर, गोंडा में पकड़ा गया स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाला निजी कंपनियों और दोषी उपभोक्ताओं की मिलीभगत के साथ किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है। नीरज बिंद, कृष्णा सिंह, विजय सिंह, प्रवीण सिंह, अरविंद कुमार ने जांच की मांग की है।
निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का प्रदर्शन
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के प्रस्ताव को लेकर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को कर्मचारियों ने उपकेंद्रों, बिजली कार्यालयों पर प्रदर्शन कर आवाज बुलंद की। निजीकरण से पहले वर्टिकल सिस्टम के नाम पर हजारों पदों को समाप्त करने का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदर्शन में मीडिया सचिव अंकुर पांडेय ने कहा कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल सिस्टम लागू कर रहा है। इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त करने का प्रयास है। मुख्यमंत्री से मांग है कि वह इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें। पद समाप्त करने और छंटनी की मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। छह हजार पद समाप्त किए जा रहे हैं।
स्मार्ट मीटर लगाकर जो पुराना मीटर कंपनियों के प्रतिनिधि की ओर से उतारा जा रहा है। उसकी गहनता से जांच करवाई जाएगी। अगर किसी भी मीटर में डेट गड़बड़ी मिलती है तो इसकी जिम्मेदारी कंपनी की होगी। किसी भी तरीके से उपभोक्ताओं का नुकसान नहीं होगा। - राकेश पांडेय, मुख्य अभियंता