वाराणसी। पानी के दोहन के चलते भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। स्थिति यह हो गई है कि कई क्षेत्रों के हैंडपंप और नलकूप गर्मी आते ही सूखने लगते हैं। जिले के कई इलाके तो स्थिति और भयावह हो जाती है। पिछले आठ साल में एक से दो मीटर तक जलस्तर नीचे खिसका है। ऐसे में इस समस्या को दूर करने के लिए लोगों को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
दिन रात हो रही पेड़ों की कटाई से वातावरण पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है। पानी के अभाव में तालाब और कुंड सूखने लगे हैं, जिन्हें लोग पाटकर उस पर कब्जा कर रहे हैं। चारों ओर बनते जा रहे कंक्रीट के जंगल के चलते भूजल में पानी के जाले की बजाय नादियों के माध्यम से पानी बहकर समुद्र में चला जा रहा है। इसके चलते भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। केंद्रीय भूजल विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो हर साल जल स्तर नीचे ही जा रहा है। यही हाल रहा तो कुछ सालों में ही लोगों को पेयजल के लिए तरसना पड़ेगा।
जल स्तर के लगातार नीचे जाने से शहर के नलकूप और मिनी नलकूप रीबोर की स्थिति में पहुंच गए हैं, जो बचे भी हैं वह अप्रैल मई से पानी देना कम कर देते हैं, जिससे लोगों को पेयजल की समस्याओं से दो चार होना पड़ता है।
शहर में सार्वजनिक स्थानों पर करीब एक हजार हैंडपंप लगवाए गए हैं, जिसमें 600 से अधिक सूख चुके हैं। इनको फिर से चालू करने के लिए जलकल ने रीबोर का प्रस्ताव तैयार किया लेकिन बजट के अभाव में आज तक वे हैंडपंप उसी तरह पड़े हुए हैं, जो किसी काम के नहीं हैं।
वैसे तो जलस्तर हर जगह भाग रहा है, लेकिन कुछ इलाके ऐसे हैं जो खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में ध्यान देने की जरूरत है। केंद्रीय भूजल आयोग के अनुसार सारनाथ, पिंडरा, फूलपुर आदि क्षेत्र को डार्क जोन में रखा गया है, जहां पानी सामान्य से काफी नीचे जा चुका है।