वाराणसी। काशी की माटी से जुड़ी अश्विका ने लंदन में काव्य पाठ प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। अश्विका की इस उपलब्धि पर उनके ननिहाल गायघाट में खुशी का माहौल है। गायघाट में इस उपलब्धि की सूचना मिलने के बाद ननिहाल के लोगों ने मिठाई बांटी और अपनी नातिन को फोन कर बधाई दी।
लंदन में जन्मी अश्विका कुल जैतली 10 साल की हैं। अश्विका अपने नाना विनय भूषण कुल के बहुत करीब हैं और बड़ी होकर उन्हीं की तरह कार्टूनिस्ट बनाना चाहती हैं। अश्विका को कार्टून बनाने के साथ लिखने का भी शौक है। अश्विका हिंदी काफी अच्छा बोलती है। हिंदी लिखने का अभ्यास वो लंदन स्थित ब्रह्म ऋषि मिशन आश्रम में सीखती हैं। भारतीय उच्चायोग लंदन में आयोजित ‘बाल हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता’ में उन्होंने अपनी मां के साथ लिखी कविता ‘बचपन फिर ले आया’ प्रस्तुत कर सभी को अपनी कविता का कायल बना दिया।
इनके पिता विशाल जैतली लंदन स्थित टेस्को कै फे में जनरल मैनेजर पद पर कार्यरत हैं और मां अकांक्षा जैतली अकाउंटेंट है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में लंदन से उनकी दादी कामनी ने बताया कि अश्विका की उपलब्धि से वो काफी खुश हैं, वो अश्विका को हिंदी लिखने और बोलने में मदद करती हैं। साथ ही उन्हें भारतीय संस्कार और संस्कृति से जोड़े रखने की कोशिश भी करतीं हैं।
यूके हिंदी समिति 1990 में स्थापित संस्था है, जो लंदन में हिंदी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था। वर्ष 2000 से संस्था लिखित परीक्षा का आयोजन करती है।