वाराणसी। इंजन में अक्षय गति देने वाली विधि की खोज की गई है। जिस प्रकार हमारा हृदय वायुदाब पर काम करता है। इसी आधार पर इंजन पिस्टन काम करता है। यह कहना है कि बीएचयू के शोधकर्ता विकास त्रिपाठी का। शुक्रवार को पराड़कर भवन में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि बगैर ऊर्जा क्षय के ऊर्जा प्राप्त किया जा सकता है। इस खोज के लिए जो तकनीक विकसित की गई है। इसका विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण कराने की सरकार से मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा असंतुलन प्राकृतिक अक्षय गति का वास्तविक नियम है। इसके तहत असमान बलों के बंधनों में असमान ऊर्जा मांग की निर्भरता के कारण से प्रकृति में ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया हो रही है। वनस्पतियों के बंधन में वनस्पति द्वारा उत्सर्जित आक्सीजन जैसे बल की मांग पर निर्भर है। वनस्पतियां हमारे द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाई आक्साइड जैसे असमान बल की मांग पर निर्भर हैं। जैसे हम वनस्पतियों के उत्सर्जित फल रूप मल की मांग पर निर्भर हैं तो हमारे द्वारा उत्सर्जित मल की मांग पर दूसरे जीव जंतु निर्भर है। परिवर्तित ऊर्जा एक दूसरे पर निर्भर हैं। इसी के तहत ऊर्जा परिवर्तन रूपी ऊर्जा असंतुलन की गति अक्षय स्रोत है।