ज्ञानपुर। वर्ष 2014 में प्रचंड बहुमत से केंद्र की सत्ता में आई भाजपा ने 2019 में होने वाले लोकसभा की चुनावी तैयारी को तेज कर दिया है। जिले में दलित बस्तियों में प्रवास के सहारे दलितों को साधने की कोशिश की जा रही है। जिलास्तरीय पदाधिकारी, विधायक, पूर्व सांसद बस्तियों में रात को रुक कर दलितों के साथ भोजन करने के साथ ही उनके सुख-दुख में शरीक होने का दावा करने लगे हैं।
लोकसभा चुनाव को एक साल से भी कम समय बचा है। चार साल से अधिक समय गुजरने के बाद भाजपा सरकार के कई वायदे अब भी अधूरे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में दलित उत्पीड़न के मामलों संग आरक्षण को लेकर भी भाजपा पर तमाम आरोप मढ़े जा रहे हैं। 2014 में सभी वर्ग का वोट पाने के बाद बहुमत तक पहुंचने वाली भाजपा 2019 में भी हाथ से सत्ता नहीं जाने देना चाहती। पार्टी को दलित विरोधी होने का ठप्पा न लगे, इसके लिए हर जतन किया जा रहा है। पिछले एक पखवारे से जिले में दलित बस्तियों में प्रवास का कार्यक्रम चल रहा है। भाजपा के कई नेता बस्तियों में रुककर उनके साथ भोजन आदि कर झंडाबरदारी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना है कि भाजपा का यह प्रवास कार्यक्रम 2019 में असर दिखाएगा या दलित उन्हें चारों खाने चित करेंगे। दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि भाजपा का प्रवास एक गुमराह कार्यक्रम है। दलितों को सिर्फ भरमाया जा रहा है।