ज्ञानपुर। जल संरक्षण के उद्देश्य से मोरवा नदी के पुनरुद्धार के नाम पर 64 लाख रुपये पानी की तरह बहा दिए गए लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं आया। न तो नदी की ठीक से सफाई हुई और न ही जल का संरक्षण हुआ। नदी की तलहटी में धूल उड़ रही है और मोरवा एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रही है।
जनपद की सीमा से सटे इलाहाबाद के उपरदहां ताल से निकली मोरवा नदी ज्ञानपुर और भदोही ब्लाक के 46 गांवों से होकर गुजरती है। इसकी लंबाई करीब 46 किलोमीटर है। इस नदी का वजूद पूरी तरह खत्म हो चुका है। जल संरक्षण को लेकर प्रशासन की ओर से गत वर्ष भी नदी की सफाई अभियान चलाया गया था। जगह- जगह पानी आने के कारण कार्य रोक दिया गया था। सांसद और तत्कालीन जिलाधिकारी के प्रयास से चार माह पूर्व तीन ब्लॉक के 31 गावों में 37 हजार मानव दिवस सृजित कर मोरवा में खुदाई की गई। एक मीटर गहरा और 25 मीटर लंबाई में खुदाई की गई। शुरूआत में पानी का संरक्षण भी दिखा लेकिन गर्मी आते ही नदी पूरी तरह सूख गई है। बताते चलें कि साल भर बारिश को छोड़कर मोरवा सूखी रहती है। प्रशासन की पहल अगर फलीभूत होगी तो आसपास के गांव के किसानों को काफी लाभ मिलेगा साथ ही पशु- पक्षी भी लाभान्वित होंगे। श्रमायुक्त मनरेगा अजीत सिंह ने कहा कि मनरेगा के तहत 37 हजार मानव दिवस सृजित किया गया। जिस पर 64 लाख से अधिक का खर्च आया। उच्चाधिकारियों के माध्यम से मोरवा में पानी छोड़वाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वरूणा नदी में भी जल संरक्षण को लेकर स्टीमेट बनाया जा रहा है।