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चित्रों के जरिए दिया गया गौरैया संरक्षण का संदेश00

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वाराणसी। संसार में तरह-तरह के वन्य जीव और पक्षी पाए जाते हैं लेकिन प्रकृति की मार सुरक्षा और संरक्षण के अभाव में कई जीव-जंतु व पक्षी विलुप्त होते जा रहे हैं। गौरैया इनमें ही एक है। मंगलवार को विश्व गौरैया दिवस पर विवेंडर फाउंडेशन ने ‘सेव बर्ड’ की थीम पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन कर लोगों में पक्षियों के प्रति प्रेम जगाने और विलुप्त हो रही गौरैया को संरक्षित करने का संदेश दिया। बताया गया कि गौरेया की तादाद को बढ़ाया जा सकता है वशर्ते लोग जागरूक हो जाएं।
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अस्सी घाट पर बीएचयू, काशी विद्यापीठ और अन्य शिक्षा संस्थानों से जुड़े चित्रकार छात्र-छात्राओं ने अपनी कला के जरिए पक्षी प्रेम को जाहिर किया। किसी ने स्केचिंग के जरिए तो किसी ने पेंटिंग के जरिए गौरैया के प्रति चिंता जाहिर की। प्रतियोगिता में भाग लेने वालों में अवधेश सिंह, सुनील मौर्या, काजल निगम और लक्ष्मी सिंह और गोविंद शर्मा आदि शामिल रहे। संस्था की ओर से गौरैया को बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कलाकार अनिल शर्मा ने भी पेंटिंग के जरिए गौरैया को संरक्षित करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बीएचयू की चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयना सिंह रहीं। इस बीच वानप्रस्थ सामाजिक संस्था की ओर से अस्सी घाट पर ‘बर्ड हाउस’ वितरित किया गया। सभी को गौरैया संरक्षण की शपथ दिलाई गई। संस्था के महासचिव राकेश के मिड्ढा ने कहा कि जिन घरों में चिड़ियां चहचहाती हैं और कन्या खिलखिलाती हैं, उस घर में वास्तु दोष नहीं होता है। पेड़ों की कम होती संख्या, मोबाइल टावर रेडिएशन और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल के कारण गौरैया विलुप्त हो रही है। इस मौके पर डॉ. रत्नेश वर्मा, प्रमोद मिश्रा, अमर अग्रवाल, डॉ. अनिल गुप्ता, राजीव अग्रवाल, वासुदेव गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
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