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बढ़ी क्षमता भी पूरी, अब कहां रखेंगे चावल

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ज्ञानपुर। एफसीआई के हरियांव गोदाम की बढ़ाई गई भंडारण क्षमता भी पूरी हो गई। चावल भंडारण की समस्या से जूझ रहे जिले के समक्ष अब फिर पहले जैसा संकट खड़ा हो गया है। विभाग को समझ में नहीं आ रहा है कि अब चावल कहां रखा जाए। एक ओर मिलों में जगह न होने के कारण वे धान की दराई नहीं कर पा रहे तो दूसरी ओर दराई के लिए धान की उठान न होने से क्रय केंद्र और धान की खरीद नहीं कर पा रहे। लिहाजा हजारों क्विंटल चावल और धान मिलों और क्रय केंद्रों पर डंप पड़ा है।
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7500 एमटी क्षमता वाले हरियांव डिपो की क्षमता 2500 एमटी बढ़ाकर 10 हजार एमटी किए जाने के बाद चंद दिनों में ही डिपो फिर चावल से भर गया। लिहाजा चावल भंडारण की समस्या फिर जस की तस हो गई है। लंबे प्रयास के बाद भी जिला प्रशासन और खाद्य रसद विभाग केंद्रीय भंडारण निगम के बभनौटी में स्थित 5000 एमटी क्षमता वाले गोदाम को अभी तक हासिल नहीं कर सका है। जिलाधिकारी से लेकर खाद्य विभाग के अधिकारी इस गोदाम को हासिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। पहले यह गोदाम सीमा उत्पाद शुल्क आयुक्त इलाहाबाद क्षेत्र के अधीन था। 15 दिन से यह गोदाम सीमा शुल्क आयुक्त और सीजीएसटी आयुक्त लखनऊ क्षेत्र के अधीन हो गया है। पहले गोदाम हासिल करने के लिए आयुक्त इलाहाबाद से बात हो रही थी। गोदाम हासिल होने वाला था, तभी गोदाम आयुक्त लखनऊ के अधीन हो गया। अब जिला प्रशासन और खाद्य विभाग गोदाम हासिल करने के लिए आयुक्त लखनऊ से बात कर रहा है। मगर बात बन नहीं पा रही है। विवशता में खाद्य विभाग ने हरियांव डिपो की क्षमता 2500 एमटी बढ़ाया भी। पहले इस गोदाम की क्षमता 7500 एमटी थी। अब बढ़कर 10000 एमटी हो गई है। क्षमता बढ़ने पर भी गोदाम पूरी तरह भर गया है। जिले में 53900 एमटी धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था। लक्ष्य के सापेक्ष 70 फीसदी धान की खरीद अब तक हुई है। धान की दराई के लिए 21 राइस मिलों चयन किया गया है। लगभग 26000 एमटीँ चावल तैयार है। इसमें से 10000 एमटी चावल राइस मिलों में डंप है। जिससे मिल मालिक परेशान हैं। वे सरकारी धान की दराई नहीं कर पा रहे हैं। मिलों के बाहर सरकारी धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। जो बरसात होने पर खराब हो सकता है। जिले में पीडीएस के तहत हर माह केवल 2600 एमटी चावल का उठान होता है। केंद्रीय भंडार निगम का गोदाम नहीं मिलने पर हजारों एमटी चावल खराब हो जाएगा।
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