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रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे...

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वाराणसी। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव ‘सृष्टि’ की तीसरी शाम कोरियोग्राफी और क्रिएटिव डांस से सजी। भावी कृषि वैज्ञानिकों ने अपने क्रिएटिव डांस से जहां किसानों की जिंदगी को नृत्य में पिरोया तो किसी ने नारी शक्ति का एहसास कराया। दिन भर चली विभिन्न प्रतियोगिताओं में गायन, वादन और नृत्य के साथ ही अभिनय कौशल से प्रतिभागियों ने सृष्टि की शाम को सजाया।
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स्वतंत्रता भवन में आयोजित शास्त्रीय एवं लोकगीत प्रतियोगिता में छात्राओं के एक ग्रुप ने लोक गायिका मालिनी अवस्थी का प्रसिद्ध लोक गीत ‘...रेलिया बैनर पिया को लिए जाए रे’ प्रस्तुत कर समां बांध दिया। आलोक सिन्हा के टीम ने ...सैयां मिले लड़कइया, मैं क्या करूं गाकर तालियां बटोरीं। इसी तरह स्पर्श तिवारी के ग्रुप ने ‘...केसरिया बालम पधारो म्हारो देश, राहुल पटेल ने ...थारे बिना लागे नहीं म्हारा जिया रे, निधि प्रिया ने ...कंठ बसो महारानी, मंजिल काफले ने ...ले काली लोक गीतों की प्रस्तुति कर अपनी दावेदारी पेश की।
शाम को आयोजित क्रिएटिव डांस में शैव्या सिंह ने नारी सशक्तिकरण को नृत्य में पिरोया वहीं मोहम्मद रहमत ने किसानों की जिंदगी को। इसी क्रम में कोरियोग्राफी में शिव्या सिंह एंड ग्रुप ने काली मां के तांडव नृत्य को बखूबी प्रस्तुत किया। इसी तरह ऐश्वर्या ठाकुर एंड ग्रुप ने पर्यावरण संरक्षण पर भावपूर्ण नृत्य पेश किया। इससे पहले नाट्य प्रतियोगिताएं हुई जिसमें विशाल तिवारी के ग्रुप ने ‘रेप विक्टिम’ पर नाटक का मंचन कर पहला स्थान हासिल किया। स्किट में अनामिका के ग्रुप ने ‘पानी का रंग’ का मंचन किया जिसमें उन्होंने जल संरक्षण का संदेश दिया। इसी तरह मूक अभिनय में भी प्रतिभागियों ने गंगा, जल संरक्षण और देश के वीर जवानों के दर्द को बेहद खूबसूरती के साथ बयां किया। कार्यक्रम में प्रो. एके सिंह, डॉ. आरएस मीणा, डॉ. कल्याण घड़ेई, प्रो. एनएन सिंह, प्रो. रमादेवी, प्रो. बी जिर्ली, प्रो. ओपी मिश्रा आदि मौजूद रहे। संयोजन राजा रघुवंशी का रहा।
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