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भोजपुरी भाषा को दिलानी होगी नई पहचान

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वाराणसी। बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र की ओर से सोमवार को आयोजित परिचर्चा में भोजपुरी भाषा के उत्थान पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान वक्ताओं ने अलग-अलग माध्यमों से भोजपुरी को नई पहचान दिलाए जाने की बात कही। बतौर मुख्य अतिथि प्रवासी भारतीय केंद्र के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि भोजपुरी को नई पहचान दिलाने के लिए जरूरी है कि भोजपुरी भाषी देशों में भ्रमण किया जाए।
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अध्ययन केंद्र के राहुल ग्रंथालय में आयोजित परिचर्चा में कहा कि भोजपुरी भाषी देशों में सभी लोग अपनी संस्कृति को आज भी जीवित और संजोकर रखे हुए हैं। उन्होंने केंद्र के पुस्तकालय में पुस्तकों की खरीद के लिए 25000 रुपये की सहयोग राशि देने की बात कही। प्रो. श्रीनिवास पांडेय ने कहा कि सांस्कृतिक चेतना और अर्थगम्भीर्य से भरपूर भोजपुरी भाषा है जिसकी व्यंजक क्षमता अन्य भारतीय भाषाओं से काफी समृद्ध है। समन्वयक प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल ने स्वागत करते हुए कहा कि भोजपुरी को कलम की ताकत से ही मजबूती प्रदान किया जा सकता है तभी इसका विकास तय है। मुख्य वक्ता डॉ. अर्जुन तिवारी ने कहा भोजपुरी एक ऐसी भाषा रही है जिसमें रामभक्त व् कृष्णभक्त दोनों समाहित है ब्रज व् अवधी की तरह अलग-अलग नहीं। जो अपनी भाषा अर्थात भोजपुरी से जुड़ा रहेगा वह अपनी संस्कृति से कभी नहीं कटेगा। इस दौरान कवि मनोज भावुक, भेाजपुरी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अजय ओझा, डॉ. अपूर्व नारायण तिवारी सहित कई लोगों ने अपने विचार रखा। मुंबई से आए गायक राकेश तिवारी ने गीतों की प्रस्तुति की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिल्पा सिंह, धन्यवाद ज्ञापन शोध छात्र रुद्र प्रताप सिंह ने किया।
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