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यहां लगी आग तो जाएंगी कई जान

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वाराणसी। लखनऊ केजीएमयू स्थित ट्रॉमा सेंटर में भीषण अगलगी में 12 लोगों की जान चली गई है। अगर शहर के सरकारी अस्पतालों में आग से बचाव को लेकर बेपरवाही देखें तो सिर पकड़ लेंगे। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा की इमरजेंसी, वार्ड और ऑपरेशन थिएटर में कोई अग्निशमन यंत्र ही नहीं है। जिला महिला अस्पताल और दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में कुछ जगहों पर अग्निशमन यंत्र लगे हैं, वे एक्सपाइरी डेट के। ऐसे में इन अस्पतालों में आग लगती है तो तय है कि भीषण जन-धन हानि होगी।
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अस्पतालों में अक्सर शार्ट सर्किट से अगलगी की घटनाएं होती रहती हैं। इन सबके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नहीं चेतते हैं। जिला महिला अस्पताल में वार्डों में कहीं भी यंत्र नहीं दिखे। पुराने ऑपरेशन थिएटर के पास लगा यंत्र एक्सपायर हो चुका है। इस पर लगाने की तिथि 14 जून, 2016 दर्ज है और एक्सपायरी डेट 13 जून, 2017। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के वार्डों के सामने लगे यंत्र पर भी एक्सपाइरी तिथि एक जून, 2017 दर्ज है।
क्या कहते हैं अधिकारी
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा के प्रमुख अधीक्षक के मुताबिक अग्निशनमन विभाग को दो माह पहले पत्र भेजा जा चुका है। इसके अलावा मॉक ड्रिल के लिए भी कहा गया था। इन पत्रों का कोई संज्ञान नहीं लिया गया। दीनदयाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि एक्सपायर अग्निशमन यंत्रों को जल्द बदलवाया जाएगा।
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आपदा प्रबंधन काउंटर पर ताला
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा की इमरजेंसी में आपदा प्रबंधन काउंटर तो है लेकिन इस पर लंबे समय से ताला लटका है। यहां अंदर एक अलमारी और कुछ सामान पड़ा है, जिसे देखकर लगता है कि लंबे समय से यह काउंटर खुला ही नहीं है।
बीएचयू मेें पुख्ता इंतजाम
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम हैं। पिछले साल इमरजेंसी की एसी में ब्लॉस्ट के बाद यहां आग से बचाव संबंधी इंतजाम और पुख्ता कर दिए गए हैं। जगह-जगह अग्निशमन यंत्र लगाए जाने के साथ ही अस्पताल में एक फायर टैंक भी है।
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