वाराणसी। बीएचयू में आपरेशन के बाद हुई मौतों के मामले में 48 घंटे बाद शनिवार को जांच रिपोर्ट नहीं जमा हो सकी। उधर, मृतक के एक परिजन ने लंका थाने में बीएचयू के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया है। इसे लेकर अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। आशंका जताई जा रही है कि अस्पताल प्रशासन अपनी गलतियों पर परदा डालने में लगा हुआ है।
गौरतलब है कि छह औ सात जून को बीएचयू अस्पताल में आपरेशन के बाद 24 घंटे के अंदर तीन मरीजों की मौत हो गई थी। अस्पताल प्रशासन ने बेहोशी के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन आईसोफ्लोरेन की गुणवत्ता सही न होने और ओवरडोज होने के साथ ही नाइट्रस आक्साइड गैस में गड़बड़ी की आशंका जताई थी। अस्पताल प्रशासन ने भी दावा किया था कि मरीजों ने बाहर से दवा लाई थी, जबकि शनिवार को मृतका आरती देवी के दामाद अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने दवा अस्पताल की ही उमंग फार्मेसी से खरीदी थी। मरीज की मौत के बाद उन्होेंने पोस्टमार्टम कराने के लिए भी कहा था लेकिन डॉक्टरों ने उन पर दबाव बनाकर वापस कर दिया। यहां अस्पताल प्रशासन सवाल के घेरे में इसलिए भी आ गया है क्योंकि चिकित्सा अधीक्षक ने कहा था कि मरीज अपनी मर्जी से बिना पोस्टमार्टम कराए वापस लौट गए थे। फिलहाल अजय कुमार की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और मेडिकल एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज लिया गया है।
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48 घंटे बीते, जांच समिति ने नहीं पेश की रिपोर्ट
वाराणसी। सर सुंदरलाल अस्पताल में आपरेशन के बाद हुई मौतों के मामले में 48 घंटे बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं जमा हो सकी। शनिवार को दोपहर दो बजे जांच रिपोर्ट जमा करने का 48 घंटे का समय पूरा हो गया था। पूरी उम्मीद जताई जा रही थी कि समिति शनिवार को अपनी रिपोर्ट दे देगी, ताकि इस मामले में कार्रवाई की जा सके। साथ ही अस्पताल में चिकित्सकीय सुविधा व्यवस्थित हो सके। देर शाम तक समिति ने रिपोर्ट जमा नहीं की। उधर, जांच समिति ने दो चरणों में बैठकें की। कई लोगों से पूछताछ की गई। डॉक्टरों से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक से पूछताछ की गई। इसे लेकर भी आशंका जताई जा रही है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने लोगों को बचाने में लगा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने बताया कि समिति ने अपनी रिपोर्ट अभी नहीं सौंपी है। बताया जा रहा है रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। उम्मीद है कि रविवार को ये रिपोर्ट सौंपी जाएगी। फिलहाल तब तक मेजर आपरेशन नहीं होंगे। उधर, कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी समेत आईएमएस के निदेशक, चिकित्सा अधीक्षक ने सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर की आपात चिकित्सा, ओपीडी और ओटी का निरीक्षण कर उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। आईसीयू में भर्ती मरीजों का भी हाल जाना।
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...तो कंपनियों को ही ठहराया जाएगा दोषी
वाराणसी। तीन मरीजों की मौत के मामले में लापरवाही का ठीकरा दवा कंपनियों के सिर ही फोड़ा जाएगा। जिस तरह अस्पताल प्रशासन ने इंजेक्शन आईसोफ्लोरेन के ओवरडोज और नाइट्रस आक्साइड गैस में गड़बड़ी को सामने रखा गया है, उस लिहाज से आशंका है कि कार्रवाई के घेरे में इन दोनों कंपनियों पर गाज गिर सकती है। एमएस डॉ. ओपी उपाध्याय का कहना है कि मरीज बाहर से दवा लेकर आए थे। इसलिए अगर इसमें कोई खामी हुई तो दवा कंपनी व दवा विक्रेता कार्रवाई की जद में आएंगे। इसी तरह नाइट्रस आक्साइड गैस में कुछ गड़बड़ी हुई तो इसे सप्लाई करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होगी।