इसी क्रम में विशिष्ट अतिथि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश सिंह टिकैत ने कहा कि देश के असली हीरो के पैतृक गांव में आकर बहुत गौरव महसूस कर रहा हूं, जो देश सरहद पर दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देकर पाकिस्तान के घमंड को तोड़ दिया।
गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी ने कहा कि जिले के युवाओं के पास सीमाओं पर लड़ने का जज्बा है। उन्होंने बिग्रेडियर से जिले में स्पेशल भर्ती कैंप लगाने आग्रह किया। उन्होंने मंच से एलान किया कि पार्क में एक बेहतर म्यूजियम बनवाया जाएगा जिसमें वीर हमीद की शौर्यगाथा के साथ ही देश रक्षा के लिए सेना की वीरता का बखान होगा। इसी क्रम में जिले में सैनिक स्कूल भी खोलने की पहल करने का भी आश्वासन दिया।
इस मौके पर सेना के जवानों में लेफ्टिनेंट कर्नल एसके जोशी और कर्नलए एके पांडेय, जिलाधिकारी के बालाजी, पुलिस अधीक्षक डा. अरविंद चतुर्वेदी सहित भारतीय किसान यूनियन के पूर्वांचल के सभी जिला अध्यक्ष, उमाशंकर कुशवाहा, राम अशीष सिंह, प्रधान जनार्दन यादव, रमेश यादव, रामवृक्ष यादव, लालजी यादव, विजय यादव, गणेश पाल, अनिकेत चौहान, डाक्टर आरपी पांडेय, राजेश पटेल सहित कई लोग उपस्थित थे।
वीर हमीद की प्रतिमा का नहीं हुआ माल्यार्पण :
देश की शान तथा परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का शहादत दिवस इस बार बहुत फीका रहा। सबसे खास बात यह रही कि हर बार फूल-मालाओं से लाद दिए जाने वाली उनकी प्रतिमा को इस बार एक भी फूल नसीब नहीं हुआ। सारी औपचारिकताएं उनके चित्र पर निभाई गई।
मुख्यमंत्री का आगमन स्थगित हो जाने से उनकी नई प्रतिमा का अनावरण तक नहीं हो सका और न ही उनके पैतृक गांव में बने अस्पताल का लोकार्पण किया गया। सेना, उद्योगपतियों, फिल्मी हस्तियों, राजनीतिक दलों तथा समाजसेवी आदि से पट जाने वाला यह खास दिन आज देश के नामचीन हस्तियों की बाट निहारता रहा।
शहीद वीर अब्दुल हमीद की यह 54वीं शहादत दिवस था। पूर्व के 53 सालों तक यह समारोह बड़े स्तर पर मनाया जाता रहा हैं। इसमें हर क्षेत्र की एक से एक बड़ी-बड़ी हस्तियां उत्साह के साथ भाग लेती थी। एक से बढ़कर एक कार्यक्रम भी होते थे। शहीद की पत्नी रसूलन बीबी हर बार घूम- घूम कर निमंत्रण पत्र भी बांटती थी। अभी दो माह पहले ही रसूलन बीबी का निधन हो गया।