वाराणसी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के करौंदी स्थित क्षेत्रीय केंद्र पर शनिवार को प्रयागराज में हुए भव्य कुंभ पर आधारित वृत्तचित्र का प्रदर्शन और परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में मुख्य वक्ता अखिल भारतीय विद्वत परिषद कामेश्वर उपाध्याय और बीएचयू संस्कृत विद्वा धर्म विज्ञान संकाय के प्रो. भगवत शरण शुक्ल रहे। अध्यक्षता प्रो. जयशंकर लाल त्रिपाठी ने की।
परिचर्चा में प्रो. भगवत शरण शुक्ल ने कुंभ के पौराणिक पत्रों का उल्लेख किया। आचार्य कामेश्वर उपाध्याय ने कहा कि गया, प्रयाग एवं काशी का त्रिस्थली सेतु हैं। काशी कुंभ क्षेत्र से बाहर है क्योंकि काशी तारक नगरी है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. जयशंकर लाल त्रिपाठी ने कहा कि अमृत की अमरत्व की भावना ने इस कुं भ पर्व को महत्वपूर्ण बनाया। परिचर्चा के बाद 69 मिनट के वृत्तचित्र का प्रदर्शन हुआ। वृत्तचित्र में सनातन संस्कृति के विविध पक्ष को अत्यंत ही रोचक ढ़ंग से चित्रित किया गया है। संचालन प्रो. रजनीकांत त्रिपाठी, धन्यवाद डॉ. नरेंद्र दत्त तिवारी ने किया। कार्यक्रम में प्रो. चंद्रभूषण झा, प्रो. श्रीप्रकाश पांडेय, डॉ. प्रियंका तिवारी, डॉ. रंजना गिरी, सुनीता सिंह आदि शामिल रहे।